आनी के सरयोलसर में बर्फबारी के चलते बूढ़ी नागिन मंदिर के कपाट पांच माह के लिए बंद हो गए हैं। भुंतर से दिल्ली और चंडीगढ़ के लिए हवाई उड़ानें भी प्रभावित रहीं।
उधर, मनाली से सटे सोलंगनाला, गुलाबा, कोठी और मढ़ी में बर्फ की चाह में शुक्रवार को सैकड़ों पर्यटक उमड़े और खूब मौज-मस्ती की।
नवंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी से जनजातीय क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
दो दिन में रोहतांग दर्रे पर 110 सेंटीमीटर, बारालाचा में 130, कुंजुम दर्रा में 80, कोकसर में 50, जिला मुख्यालय केलांग में 15, जलोड़ी दर्रे में 20, सोलंगनाला में 15 सेंटीमीटर बर्फबारी रिकॉर्ड हुई है। लाहौल-स्पीति के कई लोग कुल्लू, मनाली, पतलीकूहल आदि क्षेत्रों में फंसे हैं।
पर्यटन नगरी डलहौजी के लक्कड़मंडी, पौलहाणी माता, जोत, भरमौर, पांगी, तीसा की चोटियों और निचले क्षेत्रों में बर्फबारी ने लोगों को घरों में ही कैद करके रख दिया। कांगड़ा में धौलाधार और बड़ा भंगाल की चोटियों पर बर्फबारी, जबकि निचले कई क्षेत्रों में बारिश हुई है।