हिमाचल अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने मांग की है कि 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए। राज्य के कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के साथ जोड़ा जाए। महासंघ की मांग है कि सरकार एक सामान वेतन नीति के तहत 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को प्रदेश में लागू करे।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को एक ज्ञापन भी सौंपा है। महासंघ तदर्थ कमेटी अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि भर्ती एवं पदोन्नति नियमों कोे संशोधन कर सरलीकरण करने की मांग की है।
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के विभागों में कुछ वर्गों के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में निहित शर्तें अव्यवहारिक हैं, जो समय-समय पर छोटे कर्मचारियों की पदोन्नति में अवरोध बनी हुई हैं। इस कारण वर्षों तक कर्मचारियों की पदोन्नतियां प्रभावित हो रही हैं।
सरकार की नीति भी है कि हर कर्मचारी को उसके वर्ग में समय-समय पर पदोन्नतियां होनी चाहिए। वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ, वरिष्ठ आशुलिपिक के पद पर 5-6 वर्ष का सेवाकाल पूर्ण न होने के कारण वह पदोन्नत नहीं हो पा रहे हैं।
वर्ग में सालों से पद रिक्त हैं। कर्मचारियों को पदोन्नति लाभ देने बारे एक मुश्त नियमों में छूट दी जाए, जबकि बड़े अधिकारियों की पदोन्नतियां करते समय ऐसी नीतियां अपनाई जाती हैं।
उनका कहना है कि 18 अप्रैल, 2007 को सरकार ने विभागीय परीक्षा से संबंधित एक अधिसूचना जारी की, जिसमें राजपत्रित पद पर पदोन्नत होने के लिए विभागीय परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया। इससे पूर्व 55 वर्ष की आयु के बाद विभागीय परीक्षा में छूट का प्रावधान रहा है।
इससे अनुभवी और वरिष्ठ कर्मचारी वरिष्ठता के आधार पर अपनी सेवानिवृत्ति के समय पदोन्नति से लाभान्वित होता रहा है। अप्रैल 2007 में सचिवालय काडर के कुछ लोगों ने सरकार से अधिसूचना जारी करवाकर इसे अनिवार्य कर दिया है।
महासंघ ने मांग की है कि अप्रैल 2007 से पूर्व की व्यवस्था को लागू करते हुए 56 वर्ष की आयु उपरांत विभागीय परीक्षा में छूट दें। पुराने पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी की है। दैनिक श्रमिक कर्मचारियों की नियमित अवधि 3 वर्ष करने की मांग भी उठाई है।