हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के उपमंडल नादौन में लहड़ा जिला परिषद वार्ड से निर्दलीय सबसे युवा प्रत्याशी संजीव कुमार सेठी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। सेठी ने अपनी कानून तक की पढ़ाई दिहाड़ी मजदूरी कर पूरी की है। वह छुट्टी वाले दिन ट्रकों से ईंटे, बजरी उतारकर या मिस्त्री के साथ दिहाड़ी लगाते थे। नेतृत्व करने का शुरू से ही शौक रहा है। इसके चलते कॉलेज में छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और माकपा समर्थित एसएफआई के जिला अध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष रहे।
अब लहड़ा वार्ड से चुनाव लड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यहां कुल पांच प्रत्याशी मैदान में थे। ऐसे में कड़े मुकाबले के बीच सेठी ने जीत दर्ज की है। संजीव सेठी एसएफआई के कार्यकर्ता के तौर पर राजनीति में आए थे। संगठन का मानना है कि एसएफआई को हमीरपुर जिले में मजबूत करने में सेठी का अहम योगदान रहा है। 28 वर्षीय संजीव के पिता लाल चंद ग्रामीण डाक विभाग में पोस्टमास्टर और माता सलोचना देवी गृहिणी हैं।
एक बहन है जिसकी शादी हो चुकी है। वर्तमान में संजीव सेठी जिला कोर्ट हमीरपुर में वकील के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं व प्रदेश विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट हैं। वर्तमान में भारत के जनवादी नौजवान सभा में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हैसियत से सक्रिय हैं। इस जीत का श्रेय संजीव ने आम जनता को दिया है और आश्वस्त किया कि जिला परिषद सदस्य के तौर पर अपनी जिम्मेवारी को बखूबी निभाएंगे।
संजीव कुमार सेठी ने कहा कि समाज के हर वर्ग की समस्या को समझते हुए उनके समाधान के लिए दिन रात मेहनत करेंगे। पिता डाक विभाग में तो हैं, लेकिन उनका वेतन कम हैं। जिससे घर का खर्च मुश्किल हो जाता था। उन्होंने दिहाड़ी मजदूरी कर अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा किया है।