चौरी पंचायत के दो भाइयों ने साबित कर दिया है कि मेहनत और हिम्मत के आगे बड़ी सी बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाती है। लंबे समय तक होटल व्यवसाय से जुड़े इन भाइयों की कोरोना के चलते नौकरी चली गई पर इन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सुनील और देशराज न सिर्फ नया काम सीखा बल्कि काम में माहिर भी हो गए। दोनों ने मात्र पांच माह में ही मिस्त्री का काम सीख लिया और अब दोनों क्षेत्र में निर्माण कार्यों के ठेके ले रहे हैं। दोनों अपना परिवार तो चला ही रहे हैं, साथ ही पंचायत के छह और युवाओं को रोजगार दिया है।
देशराज शर्मा और सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि वह 15 वर्षों से होटल व्यवसाय से जुड़े हुए थे। मगर कोरोना महामारी ने सारे होटल बंद करवा दिए और उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस मुश्किल घड़ी को उन्होंने अवसर बनाते हुए लोगों के घरों के आसपास तथा सड़कों के डंगों के काम पकड़े। इस काम के लिए उन्हें और भी लोगों की जरूरत थी, जिसके लिए उन्होंने अपने ही व्यवसाय से जुड़े दूसरे भाइयों को भी साथ में जोड़ा। इस दौरान उन्होंने पंचायत में सड़क किनारे डंगे, घरों में दीवारें, रास्तों पर छोटी पुलियां बनाने का काम किया।
इस काम में गांव के अशोक शर्मा और सतीश कुमार ने भी साथ दिया, वह भी होटल लाइन छूटने से परेशान थे। पिछले दो महीनों में इन्होंने इसी काम से लगभग बीस हजार रुपये प्रति व्यक्ति कमाई की है। कहा कि बाद में इन्हें जब और काम मिलने शुरू हुए तो छह और लोगों की जरूरत पड़ी। तब विशाल शर्मा, संजय कुमार, मनोहर लाल, पृथ्वी चंद, रोहली राम और अमीं चंद को भी उन्होंने अपने साथ शामिल कर दिया। दोनों भाइयों ने बेरोजगार युवाओं से भी आग्रह किया है कि वह घर के आसपास अवसर तलाशें और आत्मनिर्भर बनें।