आजादी के बाद भी हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की भड़ियां कोठी पंचायत के तड़ग्रां गांव के बाशिंदे रावी नदी को पार करने के लिए झूला पुल (घरूरू) का सहारा ले रहे हैं। झूले से रावी को पार करते समय कई लोग घायल भी हो चुके हैं। नदी को पार करने के लिए झूले को दो लोग खींचते हैं। कई लोगों की उंगलियां गरारी में फंसने से कट चुकी हैं। एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है।
सबसे ज्यादा परेशानी का सामना स्कूली बच्चों को करना पड़ता है। झूले में एक साथ सात से आठ बच्चों को बैठाकर रावी नदी पार करवाई जाती है। दो बार स्कूली बच्चे रावी नदी के मुहाने में फंस भी चुके हैं। इन्हें दमकल विभाग के कर्मचारियों ने रेस्क्यू कर बचाया था। उसके बाद भी अभी तक गांव के लिए न पैदल पुल और न ही सड़क का निर्माण किया जा सका है।
ग्रामीणों एन सिंह, संजीव कुमार, बबूल, ओंकार, बंटी, सोनू, बलदेव, प्रताप सिंह, रवि, केवल और प्रकाश चंद ने बताया कि तड़ग्रां गांव के लिए सड़क या पुल बनाने को लेकर ग्रामीण कई वर्षों से मांग कर रहे हैं लेकिन आज दिन तक उनकी यह मांग किसी भी सरकार ने पूरी नहीं की। यही वजह है कि तड़ग्रां गांव के लोगों को रावी नदी पार करने के लिए आज भी घरूरू (झूला) का सहारा लेना पड़ रहा है। दिन के समय लोग जैसे तैसे रावी नदी को पार कर लेते हैं। रात के घरूरू के जरिये रावी पार करना मुश्किल हो जाता है।
सदर विधायक पवन नैयर ने कहा कि तड़ग्रां गांव के लिए जल्द सड़क या पैदल पुल का निर्माण किया जाएगा। इसको लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से भी बात कर ली है। इस समस्या का वह प्राथमिकता के आधार पर समाधान करेंगे।