नवनियुक्त मंत्री सुखराम चौधरी की पहली पसंद ऊर्जा मंत्रालय है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय देने का अधिकार क्षेत्र मुख्यमंत्री का है। लेकिन बतौर कनिष्ठ अभियंता (जेई) उन्होंने 15 साल बिजली बोर्ड में काम किया है। लिहाजा, उन्हें इसका अनुभव है। पिछले छह महीने के भीतर सिरमौर जिला में बदले सियासी समीकरणों ने अब चौधरी के मंत्री बनने के बाद नई करवट ली है। सिरमौर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बाद मंत्री मिलने से लोगों की उम्मीदों को भी पंख लग गए हैं।
वर्ष 1997 में सक्रिय राजनीति में आए चौधरी ने वर्ष 1998 में पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन 2400 मतों के अंतर से हार गए। वर्ष 2003 में जीते पर सरकार कांग्रेस की बनी। वर्ष 2007 में जीत हासिल की तो प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार में चौधरी को मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) का ओहदा मिला। वर्ष 2012 में चौधरी निर्दलीय प्रत्याशी किरनेश जंग से 690 मतों से हार गए।
लेकिन, सुखराम चौधरी ने जिला भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपनी पकड़ क्षेत्र में बनाए रखी और वर्ष 2017 में 12,690 मतों से जीत हासिल की। कार्यकर्ताओं को तब निराशा हाथ लगी, जब मंत्रिमंडल में इन्हें शामिल नहीं किया गया। चौधरी ने अपना संघर्ष जारी रखा और लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप को पांवटा क्षेत्र से करीब 27,517 मतों की बढ़त दिलाई। उल्लेखनीय है कि चौधरी प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष के अलावा जिला भाजपा उपाध्यक्ष और तीन बार जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। लोगों के काम के लिए भी चौधरी जेब से पैसा खर्च कर बस में शिमला सचिवालय तक पहुंच जाते थे।