छह दशक बाद आखिर घुमारवीं विस क्षेत्र को गर्ग के रूप में मंत्री मिल गया। इससे पहले वर्ष 1967 से 2020 तक घुमारवीं विस क्षेत्र के किसी भी विधायक को मंत्री पद प्राप्त नहीं हुआ। लेकिन साल 1982 से आरएसएस से शुरुआत करने वाले घुमारवीं के वर्तमान विधायक राजेंद्र गर्ग को घुमारवीं विस क्षेत्र से पहला मंत्री पद पाने का गौरव प्राप्त हुआ है। विद्यार्थी राजनीति से सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने वाले राजेंद्र गर्ग वर्ष 1982 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से बतौर स्वयंसेवक जुड़े।
साल 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय रूप से जुड़े। 1986-87 संयोजक एबीवीपी जिला बिलासपुर और 1987-88 के दौरान प्रदेश सचिव एबीवीपी रहे। साल 1990-97 के दौरान वह मध्य प्रदेश में संपूर्ण समय संगठन सचिव एबीवीपी रहे। साल 2000-2006 के दौरान उन्होंने घुमारवीं उपमंडल से सक्रिय पत्रकारिता में कार्य किया। सक्रिय राजनीति में भाग लेते हुए 2006-2010 के दौरान राजेंद्र गर्ग भाजपा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक, सदस्य निदेशक एचपी राज्य शिक्षा बोर्ड व एचपी तकनीकी शिक्षा बोर्ड जैसे पदों पर रहे, और 2009-11 सदस्य भाजपा राष्ट्रीय प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के पद पर रहे।
वर्ष 2012 में गर्ग ने घुमारवीं विस क्षेत्र से पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के राजेश धर्माणी से हार गए। 2017 में उन्हें नड्डा का करीबी होने का फायदा मिला और उन्हें घुमारवीं से एक बार फिर टिकट मिला। इस बार उन्होंने राजेश धर्माणी को भारी मतों से पराजित किया। नड्डा के करीबी होने और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ विद्यार्थी राजनीति से ही अच्छे संबंधों के चलते उन्हें घुमारवीं चुनाव क्षेत्र से पहली बार मंत्री के रूप में चुना गया।
राजेंद्र गर्ग का जन्म 30 मई 1966 को माता सुंदरी देवी व पिता बलदेव के घर घुमारवीं उपमंडल के गांव ठंडोडा बिलासपुर में हुआ। गर्ग ने एमएससी (वनस्पति विज्ञान) 1990 में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से की। उनका विवाह राजकुमारी से हुआ जो एक शिक्षिका हैं। गर्ग का एक बेटा मृदुल और एक बेटी विभा हैं।