हिमाचल प्रदेश में सोमवार से कोरोना कर्फ्यू की सख्त बंदिशों के लागू होने से पहले ही रविवार को सरकारी व निजी बसों के पहिये थम गए। प्रदेश के अंदर अंतर जिला और लोकल बसों का संचालन न के बराबर हुआ। इस कारण एक से दूसरे स्थान पर जाने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हिमाचल प्रदेश में सोमवार से कोरोना कर्फ्यू की सख्त बंदिशों के लागू होने से पहले ही रविवार को सरकारी व निजी बसों के पहिये थम गए। प्रदेश के अंदर अंतर जिला और लोकल बसों का संचालन न के बराबर हुआ। इस कारण एक से दूसरे स्थान पर जाने के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, सोमवार से बसों के संचालन बंद होने की खबर के साथ ही प्रदेशभर में काम कर रहे दूसरे राज्यों से आए मजदूरों और कर्मियों ने घर वापसी शुरू कर दी। ज्यादातर जगह निर्माण और अन्य कार्य बंद होने से मजदूर रोजगार के प्रति आशंकित हो गए हैं।
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रविवार को आईएसबीटी शिमला समेत विभिन्न जिलों के इंटर स्टेट बस अड्डों पर चंडीगढ़ और दिल्ली जाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। आईएसबीटी टूटीकंडी के डिपार्चर फ्लोर पर टिकट काउंटर के बाहर सुबह से ही कतारें लग गईं, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का भी उल्लंघन हुआ। बसों के लिए लोगों को आईएसबीटी में भी घंटों इंतजार करना पड़ा। भारी संख्या में प्रवासी मजदूर रविवार को शिमला से अपने घरों को निकल लिए। नादौन में भी प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया और कई झुग्गियां खाली हो गईं। रविवार को ही सरकारी बसों का संचालन कम होने की वजह से लोग निजी वाहनों और टैक्सियों के सहारे भी घर लौटने को बेताब दिखे।
दरअसल, पिछले साल कोविड के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद बड़े पैमाने पर बाहरी राज्यों के लोग वापस चले गए थे। उस दौरान महाराष्ट्र से लेकर गुजरात और हिमाचल प्रदेश तक से मजदूरों ओड़िसा, बिहार, झारखंड और यूपी जैसे राज्यों की ओर निकल पड़े थे। चूंकि केंद्र के निर्देश पर वाहनों की आवाजाही बंद थी, ऐसे में लोग पैदल ही चल पड़े थे। उसी आशंका के चलते इस बार मजदूर पहले ही चरण में अपने घरों की ओर कूच करने लगे हैं।