स्मार्ट सिटी मिशन में शिमला में स्थापित एक एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) हिमाचल प्रदेश को हाल ही में हुई मानल-चंडीगढ़ हाईवे जैसी घटनाओं से निपटने में मदद करेगा। 34 सेंसरों की एक श्रृंखला के माध्यम से यह ऐसे भूस्खलनों के निपटारे में सहायता करेगा। हिमाचल प्रदेश के भूस्खलन और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में तैनात सेंसरों की समय पर कार्रवाई के लिए आईसीसीसी में निगरानी की जाएगी। आईसीसीसी के जल्द ही पूरी तरह से चालू होने की संभावना है।
शिमला आईसीसीसी में निगरानी के उद्देश्य से कुल 45 टर्मिनलों वाले 15 कार्य स्टेशन हैं। आईसीसीसी का एक डाटा सेंटर भी है। शिमला स्मार्ट सिटी लिमिटेड (एसएससीएल) के महाप्रबंधक अजीत भारद्वाज ने कहा कि यह अगले 7-8 दिन में पूरी तरह कार्य रूप में आ जाएगा और आपदाशमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पिछले सप्ताह भूस्खलन और बाढ़ के कारण पर्यटकों सहित सैकड़ों यात्री मंडी जिले में मनाली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 24 घंटे से अधिक समय तक फंसे रहे।
राजमार्ग के 70 किलोमीटर लंबे मंडी-पंडोह-कुल्लू मार्ग पर अचानक आई बाढ़ से मंडी शहर से लगभग 40 किमी दूर औट के पास खोती नाला में अवरुद्ध हो गया, जबकि मंडी-पंडोह मार्ग भूस्खलन के बाद 6 मील के पास बंद हुआ। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के प्रवक्ता राजीव जैन ने कहा कि एसएससीएल की ओर से स्थापित एकीकृत आईसीसीसी 17 विभिन्न विभागों को एक ही मंच पर लाने और संचार क्षमताओं को एकीकृत करने और साइबर सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक एंड-टू-एंड निगरानी तंत्र भी प्रदान करेगा।
हिमाचल प्रदेश में दो आईसीसीसी शिमला और धर्मशाला में शहरी मामले मंत्रालय के ''स्मार्ट सिटीज मिशन'' में स्थापित किए गए हैं। दोनों आईसीसीसी यातायात और आपदा प्रबंधन जैसे उद्देश्यों की निगरानी और लाइव फीड प्राप्त करने के लिए दो-दो ड्रोन भी तैनात करेंगे।