शीत मरुस्थल लाहौल में तैयार होने वाले हरे मटर ने देश की विभिन्न मंडियों में दस्तक दे दी है। शुरुआती दौर में किसानों को मटर के 50 से 55 रुपये प्रति किलो दाम मिल रहे हैं। इससे किसान संतुष्ट नहीं है। पिछले साल कोरोना के बावजूद मटर सीजन के शुरुआती दौर में किसानों को घाटी में 100 रुपये प्रति किलो तक मटर के दाम मिले थे, जबकि इस बार यही दाम आधे रह गए हैं। किसानों का कहना है कि हरे मटर की गुणवत्ता बेहतर है। इसके बावजूद दाम बेहद कम है। ऐसे में किसानों को इस सीजन में घाटा उठाना पड़ेगा।
जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की पटट्न घाटी के सिंदवादी गांव में दो दिन पहले ही मटर का तुड़ान शुरू हो गया है। यहां के किसानों सुनील, गणेश और कमला ने कहा कि लाहौल में सर्दियों के दौरान कोई फसल तैयार नहीं होती है। गर्मियों के दौरान खेतों में बोई गई फसलों पर ही किसान अपना गुजारा करते हैं। मटर तैयार करने में किसानों को निराई, दवाइयां, बीज आदि पर काफी खर्च करना पड़ता है।
50 से 55 रुपये प्रति किलो तक दाम किसानों के लिए नाकाफी हैं। इस संदर्भ में कृषि उपज एवं विपणन समिति कुल्लू और लाहौल-स्पीति के सचिव सुशील गुलेरिया ने कहा कि कुल्लू और लाहौल में फल और सब्जियों की खरीदारी के लिए बाहरी राज्यों के कारोबारी आ चुके हैं। व्यापारियों के बीच प्रतिस्पर्धा से किसानों को उनके उत्पादों के अच्छे दाम मिलेंगे।