कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर होने वाला करवाचौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए खास होता है। करवाचौथ के व्रत में भगवान गणेश की वंदना समेत शंकर, माता पार्वती और चंद्र देवता की पूजा होती है। इस बार बुधवार के दिन करवाचौथ होने के कारण इसकी महत्ता और बढ़ गई है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। 4 नवंबर को करवाचौथ का व्रत है। इस दिन महिलाओं के लिए उद्यापन (मोख) का भी शुभ मुहूर्त है।
इस दिन पंडित विधिविधान से पूजा करवाते हैं और सुहागिन महिलाएं शृंगार का सामान बांटती हैं। करवाचौथ का व्रत निर्जल व्रत है। व्रत सूर्योदय से पहले आरंभ होता है, जिसमें महिलाएं सरगी खाकर व्रत की शुरुआत करती हैं। व्रत रात्रि चांद के निकलने और चांद के दर्शन तक चलता है।
यह व्रत महिलाएं खास तौर पर पति की लंबी आयु की मनोकामना के लिए रखती हैं। राजपुरोहित पंडित आशुतोष शास्त्री ने कहा कि इस बार उद्यापन के लिए शुभ मुहूर्त है। उद्यापन करवाने वाली महिलाओं ने पहले से ही उनसे समय ले लिया है। महिलाएं व्रत के दौरान नए वस्त्र पहनती हैं।