केंद्र सरकार की ओर से अमेरिका के सेब पर 20 प्रतिशत कस्टम डयूटी घटाने के फैसले से बागवान नाखुश हैं। प्रदेशॉभर के बागवानों में केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ निराशा है। उनका मानना है कि इस निर्णय से प्रदेश के सेब की डिमांड भी कम होगी और दामों पर भी असर पड़ेगा। कस्टम डयूटी बढ़ने के बाद जब विदेशी सेब देशभर की मार्केट में आना कम हुआ था तो इसका असर साफ तौर पर देखने को मिला था।
मंडियों में जहां बागवानों को ठीक दाम मिले, वहीं कोल्ड स्टोर वाले भी हिमाचली व जम्मू-कश्मीर के सेब को प्राथमिकता दे रहे थे। विदेशों में बागवानी आधुनिक तरीके से की जाती है। विदेशी सेब देखने में भी काफी आकर्षक होता है। जब यह मार्केट में उतरता है तो इसके आगे अन्य सेब फीका पड़ जाता है। कुल्लू फल उत्पादक मंडल के अध्यक्ष महेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हिमाचल व जम्मू कश्मीर में बागवान विपरीत परिस्थितियों में बागवानी कर रहे हैं।
कठिन भौगोलिक क्षेत्र होने के बाद भी सेब को सड़क तक पहुंचा दिया जाता है। सरकार के इस निर्णय से हिमाचल के सेब की डिमांड पर असर पड़ेगा। इसलिए केंद्र सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं दी लोअर कुल्लू किसान-बागवान संगठन भुंतर के प्रधान करतार सिंह गुलरिया ने सरकार के इस निर्णय से हिमाचल का सेब अब मार्केट में कम दाम में बिकेगा।
आयात शुल्क कम होने से अमेरिका के सेब के दाम भी कम होंगे। किसान बागवान संगठन के प्रधान करतार सिंह गुलेरिया ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि यह निर्णय किसान व बागवान विरोधी है। बहरहाल बागवानों में केंद्र सरकार के फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।