आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में निजी तस्वीरों और वीडियो के दुरुपयोग से बचाव के लिए अब हैशिंग तकनीक कारगर साबित होगी। किसी की सहमति के बिना उसकी प्राइवेट फोटो, वीडियो या एआई से तैयार की गई फेक इमेज इंटरनेट पर अपलोड करना आपराधिक श्रेणी में आता है। इसके बावजूद ऐसे बहुत से मामले सामने आते हैं, जिसमें तकनीक का इस्तेमाल कर व्यक्ति विशेष को बदनाम करने का प्रयास किया जाता है।
ऐसे मामलों से निपटने के लिए StopNCII.org कारगर हथियार साबित हो सकता है। प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी की गई एडवाइजरी के अनुसार हैशिंग तकनीक की मदद से लोगों की निजी एवं संवेदनशील सामग्री को इंटरनेट पर फैलने से रोका जा सकता है।
यह टूल केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति केवल अपनी ही फोटो या वीडियो के संबंध में केस दर्ज कर सकता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें असली फोटो या वीडियो कहीं अपलोड नहीं की जाती।
सिस्टम हैशिंग तकनीक के जरिये संबंधित फाइल का एक डिजिटल फिंगरप्रिंट तैयार करता है, जो उपयोगकर्ता के डिवाइस पर ही बनता है। यही हैश एक सुरक्षित डाटाबेस में दर्ज होता है। कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस डाटाबेस से जुड़े हैं। यदि वही कंटेंट कहीं अपलोड करने की कोशिश होती है, तो सिस्टम उसे पहचानकर ब्लॉक या हटाने की कार्रवाई कर सकता है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा हो, ब्रेकअप के बाद निजी फोटो लीक होने का डर हो या एआई जनरेटेड फेक इमेज के दुरुपयोग की आशंका हो।