निजी स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे भाई-बहन फीस नहीं दे पाने के कारण एक साल से पढ़ाई से महरूम हैं। दोनों को सरकारी स्कूल में दाखिला लेने के लिए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट भी नहीं दिया जा रहा है। निजी स्कूल के इस कारनामे से दोनों बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है। उधर, मीडिया में मामला आने के बाद शिक्षा विभाग ने अपने स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पहली कक्षा में पढ़ने वाली वंशिका (6) और चौथी का छात्र अनमोल (9) पुत्र सतीश कुमार तहसील ऊना की झलेड़ा पंचायत के रहने वाले हैं। इनकी देखभाल 85 वर्षीय वृद्ध दादी कमला करती हैं। कमला देवी का बेटा अशोक कुमार (65) लकवाग्रस्त है। परिवार को खाना, राशन और अन्य जरूरत का सामान लोगों की मदद से मिल रहा है। परिवार की मदद करने वाली चंचला देवी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई लोगों की मदद से चल रही थी।
सत्र 2019-20 की फीस जमा न होने पर स्कूल प्रबंधन ने सत्र 2020-21 में दोनों बच्चों की पढ़ाई बंद कर दी। एक साल से बच्चों को कुछ भी नहीं पढ़ाया गया। स्कूल प्रबंधन ने इन्हें ऑनलाइन क्लासिस से भी नहीं जोड़ा। बच्चों की पढ़ाई के लिए बड़का भाऊ टीम ने एक फोन दिया था।
उन्होंने निजी स्कूल प्रबंधन से बच्चों की परिस्थितियों को समझते हुए स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र जारी करने की मांग की है। उधर, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक देवेंद्र चंदेल ने कहा कि मामला मीडिया से पता चला है। स्कूल प्रबंधन से बात की जाएगी और समस्या का समाधान किया जाएगा।