ऊना जिले के किसानों के लिए फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया जाएगा। इस कंपनी की मुख्य बात यह होगी कि इसके शेयर होल्डर किसान होंगे। इससे कंपनी को होने वाला लाभ किसानों में ही बांटा जाएगा। फसलों का लाभ दूसरों के बजाय किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। किसानों को फसल के क्रय-विक्रय के अलावा बीज, खाद और विशेषज्ञों की सलाह भी मिल पाएगी। कंपनी का गठन केंद्र की फॉर्मेशन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन योजना में होगा।
नाबार्ड किसानों, खेतीबाड़ी सहित फसलों की मार्केटिंग आदि चीजों की पूरी जानकारी रखने वाले एनजीओ का चयन करेगा। यह एनजीओ किसानों को गांव से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक सभी फसलों के बारे में पूरी जानकारी देगा। साथ ही पंचायतों में 10 से 15 की संख्या में किसानों के ग्रुप बनाए जाएंगे। उसके बाद इन ग्रुपों को जोड़कर क्लस्टर और सभी क्लस्टरों को जोड़कर फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का निर्माण किया जाएगा। हरेक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन में 300 के करीब किसान जुड़े होंगे। इसके बाद जिला ऊना में फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी का गठन किया जाएगा।
योजना के तहत जिले में सिर्फ आलू और आम की फसल को योजना में लाया गया है। एक फसल के लिए एक एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) का गठन किया जाएगा। सरकार की ओर से अभी दो फसलों के चयन किया गया है। इसके चलते ब्लॉक स्तर पर सिर्फ दो एफपीओ का गठन होगा। जिला ऊना के हर ब्लॉक में दो एफपीओ का गठन किया जाएगा। भविष्य में अन्य फसलों को भी योजना में जोड़ा जा सकता है।
केंद्र की योजना के तहत नाबार्ड की ओर से क्लस्टर बेस बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन के नाम से एनजीओ/कंपनी का चयन किया जाएगा। इसमें अलग-अलग स्थानों से विशेषज्ञ बुलाकर तैनात किए जाएंगे। एनजीओ को अपने कार्यालय खोलने, स्टाफ तैनाती सहित अन्य कार्यों को करने के लिए नाबार्ड से 5 लाख दिए जाएंगे। अन्य फंड आदि भी एनजीओ को नाबार्ड के तहत ही दिए जाएंगे।
कंपनी को 2 करोड़ का आसान ऋण देगा बैंक
फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी बनने के लिए प्रबंधन को सरकारी/निजी बैंक की ओर से 2 करोड़ के लोन का प्रावधान होगा। इससे कंपनी अपने कार्यों, दफ्तरों को खोलने के लिए, कर्मचारियों के वेतन, फसलों को खरीदने-बेचने, बीज, दवाइयों, ट्रक, गोदाम आदि अन्य पर खर्च कर पाएगी। फसल बेचने-खरीदने, उनकी मार्केटिंग सहित अन्य प्रकार के सभी कार्य कंपनी खुद करेगी।
कृषि उपनिदेशक डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी में डायरेक्टर और सीईओ सहित अन्य बड़े पदों के लिए कर्मचारियों को किसान खुद तैनात कर पाएंगे। इससे सभी पदों पर तैनात कंपनी प्रबंधन के कर्मचारी किसानों से जुड़ी समस्याओं और उनके फायदों के लिए सही निर्णय और कार्य कर सकें।