स्थानीय नेताओं ने भी सरकार तक शिकायत करने की तैयारी की तो प्रशासन ने गलती मानते हुए पट्टिका में स्थानीय विधायक का नाम जुड़वा दिया। अमर उजाला के खबर को प्रकाशित करने और कारगुजारी के सार्वजनिक होने से तिलमिलाए डीसी ने पत्रकार वार्ता के दौरान अशोभनीय व्यवहार किया था और नोटिस भेजकर बौखलाहट निकालने का प्रयास किया। चूंकि अमर उजाला हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के लाखों पाठकों का भरोसा है और वह निष्पक्ष व निर्भीक पत्रकारिता करता रहा है।
नोटिस में पूर्व में प्रकाशित हुए एक कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के शराब पार्टी करने संबंधी खबर का भी उल्लेख कर उसे गलत बताने का प्रयास किया गया। जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व डीजीपी सीताराम मरडी सार्वजनिक मंचों व मीडिया के सामने इस घटना को सत्यापित कर चुके थे।
खास बात यह है कि चंबा जिला का प्रशासन प्रेस की स्वतंत्रता से इस कदम बौखलाया कि कोरोना काल के शुरूआती दौर में क्वारंटीन सेंटरों की दुर्दशा की खबरों को प्रकाशित करने पर पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कराई गई थी। बाद में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मामले में दखल देते हुए पत्रकारों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने के लिए कहना पड़ा था।