प्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार होने से अफसरशाही पसोपेश में है। बीते वर्षों में विधानसभा चुनाव का मतदान निपटते ही हॉलीलॉज और समीरपुर पहुंचकर अपनी निष्ठा जताने की अफसरों में होड़ लग जाती थी। अब दिसंबर में बनने वाली नई सरकार में पसंदीदा पोस्टिंग के चाहवान अफसरों की टेंशन बढ़ गई है। कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना को लेकर चल रहे कई अफसरों को अब यह पता नहीं लग रहा है कि किस नेता के पास जाकर हाजिरी लगाएं।
प्रदेश में वर्ष 1990 के बाद से भाजपा और कांग्रेस की सरकार लगातार नहीं बनी है। पांच-पांच वर्ष के लिए भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बनती रही हैं। ऐसे में हर पांच साल बाद अफसरशाही सरकार बदलने की आहट को देखते ही अपनी गोटियां फिट करने में लग जाती थी। हिमाचल में कांग्रेस की सत्ता का केंद्र रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के निजी निवास हॉलीलॉज शिमला और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेमकुमार धूमल के निजी आवास समीरपुर में अफसर मतदान निपटते ही पहुंचना शुरू कर देते थे।
नई सरकार में पसंदीदा पदों के लिए भी इसी दौरान अफसर लॉबिंग करते थे। अब प्रदेश में राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का निधन होने के बाद कांग्रेस में नेतृत्व संकट खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में हॉलीलॉज और समीरपुर तक जाने की ललक अफसरों में पहले की तरह नहीं है।
भाजपा से नजदीकी वाले अफसर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सरकारी आवास ओकओवर के चक्कर जरूर काट रहे हैं, लेकिन कांग्रेस की नजदीकी वाले अफसरों की उलझन बढ़ी हुई है। कांग्रेस में सुखविंद्र सुक्खू, मुकेश अग्निहोत्री, प्रतिभा सिंह, कौल सिंह ठाकुर, रामलाल ठाकुर, धनीराम शांडिल, आशा कुमारी को मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल माना जा रहा है।
ऐसे में अफसरों की परेशानी यह है कि इनमें किस नेता से नजदीकी बढ़ाएं। अगर उनकी पसंद का नेता मुख्यमंत्री नहीं बना तो किसी अन्य के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें नुकसान ना झेलना पड़ा। फिलहाल, कुछ अफसर अभी नतीजों के आने के इंतजार में भी हैं। रिवाज बदलने और राज बदलने की कवायद के बीच यह अफसर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार किसकी बनती है, यह देखने के बाद ही वो अपने समीकरण बैठाएंगे।