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एनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिमालय के नाम से विख्यात छेरिंग दोरजे का निधन

Fri, 13 Nov 2020 05:49 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, केलांग (लाहौल-स्पीति)
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छेरिंग दोरजे - फोटो : अमर उजाला
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एनसाइक्लोपीडिया ऑफ हिमालय के नाम से विख्यात लाहौल के 82 वर्षीय साहित्यकार छेरिंग दोरजे नहीं रहे। शुक्रवार सुबह छेरिंग दोरजे ने नेरचौक मेडिकल कॉलेज में अंतिम सांस ली। उनके जाने से पूरा हिमाचल स्तब्ध है। प्रसिद्ध साहित्यकार छेरिंग दोरजे तीन दिन पहले कोरोना की चपेट में आए थे। गुरुवार को उनकी तबीयत बिगड़ने पर कुल्लू से नेरचौक रेफर किया गया था और उन्होंने दम तोड़ दिया। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक नेरचौक मेडिकल कॉलेज डॉ. जीवानंद चौहान ने इसकी पुष्टि की है। 

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साल 1939 में गुस्कियार गांव में जन्मे छेरिंग दोरजे ने अटल रोहतांग टनल निर्माण में टशी दावा उर्फ अर्जुन गोपाल के साथ अहम किरदार निभाया है।
वह कई बार अर्जुन गोपाल के साथ दिल्ली जा कर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी से मिले। वह ट्रांस हिमालयन इलाके के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे। प्रस्तावित शिंकुला टनल भी छेरिंग दोरजे की सोच की उपज है। वह भारतीय इतिहास संकलन समिति के कई सालों तक सदस्य रहे। केलांग के समीप रोरिक आर्ट गैलरी स्थापित करने में उनका योगदान रहा।

पीएचडी के कई विदेशी शोधार्थी छेरिंग दोरजे से मिलने के लिए उनके घर पहुंचते थे। सहायक लोक संपर्क अधिकारी का पद छोड़ने के बाद वह कई सालों तक ट्रांस हिमालय के दर्रों और ग्लेशियर को पैदल नापते रहे। छेरिंग दोरजे ने कई सालों तक हिमालय क्षेत्रों की इतिहास और भूगोल की बारीकी से अध्ययन किया। वह भोटी भाषा के बड़े ज्ञाता थे।
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अपने जीवन में छेरिंग दोरजे ने हिमालय के करीब 200 दर्रों को पैदल पार किया। विदेशों में भी उनके शोधपत्र पढ़े गए। छेरिंग दोरजे हिंदी, भोटी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रशियन समेत कई विदेशी भाषा के ज्ञाता रहे। उनके इस निधन पर प्रदेश मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा, मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, विधायक किशोरी लाल सागर, सुरेंद्र शौरी ने गहरा शोक प्रकट किया है।

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