108 एंबुलेंस के पांच ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन) को जीवीके कंपनी ने बर्खास्त कर दिया है। एंबुलेंस यूनियन और कंपनी के बीच मासिक वेतन पर चल रहा विवाद बढ़ता चला जा रहा है। सोलन, सिरमौर, शिमला और हमीरपुर के पांच ईएमटी को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मासिक वेतन को लेकर 8 नवंबर से शुरू हुई पेन डाउन स्ट्राइक के चलते पांच ईएमटी को निकाला गया है।
सोलन से एक ईएमटी को बर्खास्तगी पत्र देकर निकाला गया है, जबकि एक महिला ईएमटी को दिसंबर माह की 28 तारीख से छुट्टी दे दी गई है। सभी ईएमटी ने कंपनी पर मानसिक शोषण करने का आरोप लगाया है। कोरोना महामारी से लगातार जंग लड़ रहे प्रदेश सरकार के कोरोना योद्धाओं को बर्खास्त करने से कर्मचारियों में रोष है।
सोलन से ईएमटी शंशुधीन ने कहा कि कंपनी ने दिसंबर माह का वेतन दिए बिना निकाल दिया है। मासिक वेतन पर कंपनी के साथ पेनडाउन को भी काफी समय पहले खत्म कर दिया है। जिसके बाद कंपनी ने अपना बदला लेने के लिए उनके साथ चार अन्य ईएमटी को टर्मिनेट कर दिया है। कंपनी ने हमेशा से एंबुलेंस कर्मचारियों का शोषण किया है। उधर, एंबुलेंस यूनियन के प्रधान पूर्ण चंद ने कहा कि जीवीके कंपनी ने चार जिलों के पांच ईएमटी को बर्खास्त कर दिया है।
कंपनी के खिलाफ सभी ईएमटी सोमवार को उच्च न्यायालय भी चले गए हैं। उधर, जीवीके प्रभारी रजनीश पॉल ने कहा कि ईएमटी को दुर्व्यवहार के चलते टर्मिनेट किया गया है। एक महिला ईएमटी को 28 तारीख से छुट्टी दे दी गई है। महिला ईएमटी की कोविड केस वाहन में ड्यूटी थी, लेकिन महिला काम के प्रति बहानेबाजी लगा रही थी।