कंट्रोल रूम को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग से सीधे जोड़ा जाएगा, ताकि मौसम संबंधी अलर्ट और आपात सूचनाएं तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सकें और राहत कार्यों में देरी न हो। जिला स्तर पर पुलिस की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) और होमगार्ड के जवान चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहेंगे। किसी भी क्षेत्र में भूस्खलन, अचानक बाढ़ या अन्य आपदा की सूचना मिलते ही पुलिस टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचेगी और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर बचाव एवं राहत अभियान शुरू करेगी।
मानसून के दौरान सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों के भूस्खलन संभावित स्थानों, नदी-नालों और खड्डों के किनारे विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस को स्थानीय लोगों और पर्यटकों को ब्यास, सतलुज, रावी सहित अन्य नदियों के किनारे जाने, कैंपिंग करने या वाहन पार्क करने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस पोंग डैम, पंडोह डैम और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं के प्रबंधन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखेगी। यदि बांधों से पानी छोड़ा जाता है तो निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।
निर्देशों में लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया है। बारिश या भूस्खलन के कारण बंद होने वाले मार्गों को जल्द से जल्द खोलने, ट्रैफिक डायवर्जन लागू करने और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए पुलिस सक्रिय भूमिका निभाएगी। वहीं लाहुल-स्पीति, किन्नौर और ऊपरी चंबा जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आवश्यक राशन, दवाइयों और ईंधन की आपूर्ति बनाए रखने में भी सहयोग किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और स्थानीय मीडिया के माध्यम से मौसम, सड़कों की स्थिति और यातायात संबंधी रियल-टाइम अपडेट जारी करेगी। इससे लोग यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे, जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से बचेंगे और किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
मानसून से जुड़ी किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हिमाचल पुलिस पूरी तरह तैयार है। हमारा प्रयास है कि समयबद्ध कार्रवाई, बेहतर समन्वय और त्वरित सूचना के माध्यम से जन-धन की हानि को न्यूनतम रखा जाए।- अशोक तिवारी, पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश