हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून ने पहाड़ों पर भारी असर डाला है। बारिश से जुड़ी आपदाओं, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ समेत विभिन्न घटनाओं और सड़क हादसों में अब तक 329 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य सरकार के राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की 19 सितंबर तक की संचयी रिपोर्ट में प्रदेश में जान-माल के बड़े नुकसान की तस्वीर सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 30 जून से 19 सितंबर 2026 तक आपदाओं के कारण 133 लोगों की मौत हुई, जबकि सड़क हादसों में 196 लोगों की जान गई। दोनों आंकड़ों को मिलाने पर मानसून अवधि में कुल 329 मौतें सामने आती हैं।
3,217 करोड़ से ज्यादा का आर्थिक नुकसान
मानसून के दौरान केवल जान का नुकसान ही नहीं हुआ, बल्कि निजी और सरकारी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंची है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल नुकसान 3,21,795.14 लाख रुपये दर्ज किया गया है। यह राशि करीब 3,217.95 करोड़ रुपये बैठती है।
रिपोर्ट में घरों, दुकानों, श्रमिक आवासों, पशुशालाओं और अन्य निजी संपत्तियों के नुकसान के साथ-साथ लोक निर्माण, जल आपूर्ति, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और शहरी विकास से जुड़ी सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान को भी शामिल किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मानसून अवधि में 572 पशु-पक्षियों की मौत भी दर्ज की गई है। वहीं निजी संपत्ति के नुकसान में मकानों के अलावा दुकानें, कारखाने, श्रमिक आवास और अन्य संरचनाएं भी शामिल हैं।
शिमला में सबसे ज्यादा 20 आपदा मौतें
जिला स्तर पर देखें तो आपदा से होने वाली मौतों में अलग-अलग कारण सामने आए हैं। सरकारी रिपोर्ट में शिमला में 20, कांगड़ा में 18, चंबा और लाहौल-स्पीति में 17-17, मंडी में 16 तथा सिरमौर में 15 मौतें दर्ज की गई हैं। कुल 133 आपदा मौतों में 50 मौतें पेड़ या खड़ी चट्टान से गिरने, 18 भूस्खलन, 17 डूबने, 13 सांप के काटने, 10 बिजली की चपेट में आने और दो आग की घटनाओं से जुड़ी हैं। रिपोर्ट में अन्य कारणों से हुई 22 मौतें भी दर्ज हैं।
सड़क हादसों ने भी बढ़ाया मौत का आंकड़ा
मानसून अवधि के दौरान सड़क हादसे भी जानलेवा साबित हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा शिमला में 27 मौतें दर्ज हुईं। इसके बाद कांगड़ा में 24, चंबा में 23, सिरमौर और ऊना में 22-22 तथा कुल्लू में 19 मौतें दर्ज की गईं। पूरे प्रदेश में सड़क हादसों में 196 लोगों की मौत हुई है।