केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा के बजट में की गई कटौती का असर अब धीरे-धीरे दिखना शुरू हो गया है। केंद्र से बजट नहीं आने के कारण प्रदेश की विभिन्न पंचायतों में तैनात ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) को पिछले करीब तीन-चार माह से वेतन नहीं मिल रहा है। वहीं केंद्र से पैसा नहीं आने के कारण प्रदेश सरकार ने भी अपना शेयर नहीं डाला है, जिसके चलते जीआरएस को वेतन के लिए तरसना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों को सही ढंग से संचालित करने के लिए ग्राम रोजगार सेवकों को नियुक्त किया गया है। पंचायतों में तैनात करीब 1034 जीआरएस को वेतन के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी एक्ट के तहत अलग से बजट आता था, जो कि पिछले कुछ माह से बंद पड़ा है। इसके चलते इन्हें मासिक वेतन भुगतान करने में देरी हो रही है। इसके चलते इन ग्राम रोजगार सेवकों को करीब तीन माह से वेतन नहीं मिला है।