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सेहत: पारंपरिक वन औषधियों में छिपा महिला स्वास्थ्य का खजाना, 109 औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण, 20 पर शोध

Sun, 07 Jun 2026 10:34 AM IST
Ankesh Dogra सुरेश शांडिल्य, शिमला।

सार

अंतरराष्ट्रीय शोध में हिमाचल प्रदेश के 109 ऐसे औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जिनका उपयोग ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में विभिन्न स्त्री रोगों के उपचार के लिए किया जाता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन पौधों में मौजूद जैव सक्रिय तत्व महिला स्वास्थ्य से जुड़ी नई और प्रभावी दवाओं के विकास का आधार बन सकते हैं। हालांकि, अब तक केवल 20 पौधों पर ही वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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निर्गुंडी मासिक धर्म के दर्द में लाभप्रद - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वन औषधियों में महिला स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा खजाना छिपा है। अंतरराष्ट्रीय शोध में ऐसे 109 औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जिनका उपयोग ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं, बांझपन, ल्यूकोरिया, गर्भपात, अनियमित माहवारी समेत विभिन्न स्त्री रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन पौधों में मौजूद जैव सक्रिय तत्व महिला रोगों के लिए नई और प्रभावी दवाओं के विकास का आधार बन सकते हैं। हालांकि, इनमें से अब तक केवल 20 पौधों पर ही वैज्ञानिक अध्ययन हो पाए हैं।

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यह शोध एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘गाइनोकोलॉजिकल हीलिंग : एक्सप्लोरिंग ट्रेडिशनल एथनो-मेडिसनल प्लांट्स ऑफ हिमाचल प्रदेश’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। ये पौधे 62 अलग-अलग वनस्पति परिवारों से संबंधित हैं। इनका उपयोग मासिक धर्म संबंधी समस्याओं, बांझपन, ल्यूकोरिया, गर्भपात, पेट दर्द और अनियमित माहवारी जैसी बीमारियों में होता है। प्रसव के बाद की समस्याओं और अन्य स्त्री रोगों के उपचार में भी इनका इस्तेमाल किया जाता है। अध्ययन में पाया गया कि मासिक धर्म संबंधी समस्याओं के उपचार में सबसे अधिक पौधों का उपयोग होता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इन पौधों में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्त्री रोगों के उपचार में संभावित प्रभाव दिखाते हैं। इन अध्ययनों में इन विवो और इन विट्रो परीक्षण शामिल हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों से जोड़कर नई दवाओं का विकास हो सकता है।

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शोध में मेक्सिको की नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी ऑफ मेक्सिको के डॉ. एडोल्फो एंड्रेड-सेट्टो, आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कॉटन टेक्नोलॉजी मुंबई के मनोज कुमार, वोलाइता सोडो यूनिवर्सिटी इथियोपिया के सेनापति मारिसेनैय्या, कोल्हापुर के संग्राम धूमल और स्पेन के जोस एम लोरेन्जो हैं। सोलन स्थित शूलिनी विश्वविद्यालय की दीक्षा शर्मा, राधा, सुनील पुरी और अशोक पुंडीर ने इसमें विशेष रूप से भाग लिया। टीम ने हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों का अध्ययन किया।

निर्गुंडी मासिक धर्म के दर्द में राहत देती है। कश्मल संक्रमण और अन्य स्त्री रोगों में प्रभावी है। अनार एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर है और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। बनककड़ी या हिमालयी मयएप्पल के भी औषधीय उपयोग हैं। लोधरा भारी रक्तस्राव, ल्यूकोरिया और गर्भाशय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

शतावरी का उपयोग बांझपन व प्रजनन स्वास्थ्य के लिए
शोध में कई प्रमुख औषधीय पौधों का दस्तावेजीकरण किया गया है। शतावरी का उपयोग बांझपन और प्रजनन स्वास्थ्य के लिए होता है। घृतकुमारी या ग्वारपाठा मासिक धर्म समस्याओं और सूजन कम करने में सहायक है। अश्वगंधा हार्मोन संतुलन और तनाव कम करने में मदद करता है। हल्दी सूजन और दर्द कम करने में उपयोगी है। गिलोय प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और सूजन घटाता है।
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