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हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ: राज्य स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम सख्ती से लागू करे सरकार

Sat, 17 Aug 2024 06:58 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

 शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने कोलकाता की घटना पर दुख जताते हुए न्याय की गुहार लगाई। शनिवार को विरोधस्वरूप एक दिन की हड़ताल की गई है।
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हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए हिमाचल में भी स्टेट हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट (राज्य स्वास्थ्य संरक्षण अधिनियम)को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने कोलकाता की घटना पर दुख जताते हुए न्याय की गुहार लगाई। शनिवार को विरोधस्वरूप एक दिन की हड़ताल की गई है। अब राष्ट्रीय संघ के निर्देशानुसार संघर्ष की रणनीति तय होगी। हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ के महासचिव डाॅ. विकास ठाकुर ने कहा कि कोलकाता जैसी घटना पूरे देश में बार-बार होती आई है। पिछले वर्ष केरल में हाउस सर्जन को एक अपराधी ने पुलिस के निगरानी में मार दिया।

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इससे पहले भी ऐसे हादसे हिमाचल में भी हो चुके हैं। एक महिला चिकित्सक को भीड़ की हिंसा के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैंज कुल्लू जिला में सिर पर गहरी चोट आई थी। संघ ने उस समय चिकित्सकों की सुरक्षा के साथ-साथ हेल्थ इंस्टीट्यूशन में हेल्थ केयर पर्सन फोर हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स और इंस्टीट्यूशन प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नियम लागू करने की मांग की थी। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इस समस्या को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्टेट हेल्थ प्रोटेक्शन एक्ट को सख्ती से लागू करना जरूरी हो गया है। हिमाचल में कई जगहों पर राजकीय सेवाएं देने के लिए स्टाफ नर्सों और महिला चिकित्सकों एवं चिकित्सकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण एक खौफ का माहौल बन गया है। इससे उन्हें मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

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स्वास्थ्य सचिव की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
हिमाचल चिकित्सा अधिकारी संघ ने स्वास्थ्य सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान सचिव के कार्यकाल में एक भी नई भर्ती नहीं की हुई है। संघ ने कई बार स्वास्थ्य विभाग के सामने मांगें रखीं। इस संदर्भ में 56 दिन संघर्ष का रास्ता भी अपनाया। हर बार संघ को आश्वासन दिया जाता है और विभाग उनकी मांगों को लेकर कोई भी सुनवाई नहीं करता है। मुख्यमंत्री से फरवरी में संघ की वार्ता में उन्होंने कहा था कि ऑनलाइन एसीआर मंगवा कर शीघ्र ही खंड चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नति की जाए लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसा करने में असमर्थ रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य की शक्तियां दोबारा वापस की जाए। पूरे देश भर में एनपीए दिया जा रहा है इसे हिमाचल में भी शुरू किया जाए। स्वास्थ्य विभाग 8 वर्षों से चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची नहीं बन पाई है।

संघ के पदाधिकारियों के तबादले पर रोष
संघ के कई पदाधिकारियों के तबादले किए जाने को लेकर रोष जताया गया। महासचिव डॉ. विकास ठाकुर ने बताया कि चिकित्सकों की मांगों को दबाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश की राज्य कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, सहसचिव, कोषाध्यक्ष के तबादले भी कर दिए। जिला इकाइयों से सोलन जिला के अध्यक्ष, किन्नौर जिला के महासचिव, हमीरपुर जिला के कोषाध्यक्ष, कुल्लू जिला के केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के प्रतिनिधि का भी स्थानांतरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग का ऐसा किया जाना संघ की मांगों को दबाने का सीधा प्रयास है, यह प्रजातंत्र की मर्यादा का हनन है।
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महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या पर इंडी गठबंधन चुप : बिंदल
 भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कोलकाता के अस्पताल में महिला पीजी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और निर्ममतापूर्ण हत्या से पूरा देश शर्मसार है। जो जघन्य हुआ है, उसे देश अब सहने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार प्रदेश में बेटियों को बचाने के बजाय अपराधियों को बचाने में लगी है। तब ही ममता कोलकाता में महिला पीजी डॉक्टर की रेप और हत्या मामले को सीबीआई को सौंपने में टालमटोल कर रही थीं। हाथरस में राजनीतिक पर्यटन करने वाले राहुल गांधी, कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेता ममता बनर्जी सरकार में महिलाओं पर निरंतर हो रहे बर्बरतापूर्ण दुराचार पर चुप्पी साध ली है। भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि ममता बनर्जी को यह मामला सीबीआई को सौंपने में मात्र 70 सेकंड लगते और वह ऐसा करने के लिए 7 दिन का समय मांग रहीं थीं। यह उनकी हताशा को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस जिस तरह का असंवेदनशील व्यवहार दिखा रही है, वैसा ही व्यवहार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी भी दिखा रही है।
विधायक सतपाल सत्ती ने कहा की ममता और टीएमसी के शासन में बंगाल महिलाओं के लिए नर्क से भी बदतर बन चुका है। 
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