सेना में बतौर सिपाही भर्ती हुए शीत मरुस्थल स्पीति के लोवजंग येशे लेफ्टिनेंट बन गए हैं। कुछ कर गुजरने के जज्बे ने लोवजंग को इस मुकाम तक पहुंचाया है। लोवजंग येशे शनिवार को भारतीय सेना अकादमी देहरादून में पासिंग आउट परेड में शामिल होंगे। परेड में उनकी माता दिकित अंगमो, पत्नी मेंतोक डोलमा और मुनसेलिंग स्कूल के निदेशक टशी नमज्ञाल भी शिरकत करेंगे। 13 जनवरी 1996 को स्पीति के किब्बर गांव में जन्में लोवजंग येशे ने दसवीं तक की पढ़ाई स्पीति चिल्ड्रन होम स्कूल मुनसेलिंग में हुई।
जमा एक और दो की पढ़ाई कांगड़ा वैली पब्लिक स्कूल धर्मशाला में करने के बाद वह भारतीय सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए। इस बीच उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए आज वह इस मुकाम पर पहुंचे हैं। बचपन से ही देश सेवा करने की मन में ठानी थी। मुनसेलिंग स्कूल के निदेशक टशी नमज्ञाल ने बताया कि लोवजंग येशे को बचपन से ही सेना में जाने का शौक था। नमज्ञाल ने दावा किया कि येशे ने पहला भारतीय सेना अधिकारी बनकर स्पीति का नाम रोशन किया है। तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने लोवजंग येशे को बधाई दी है।