श्रीनगर से करीब 35 किलोमीटर दूर गांदरबल जिले के वाकुरा इलाके में हुए मतदान में युवाओं ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। गुरुवार सुबह से ही मतदान केंद्रों में कतारें लग गई थीं। मतदान के लिए पहुंचे युवाओं का कहना है कि वह विकास और वंशवाद की राजनीति से बदलाव चाहते हैं। चुनाव के बहिष्कार से कुछ हासिल नहीं होता।
वाकुरा गांदरबल के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे बिलाल अहमद राथर ने कहा कि आजकल जो कुछ भी है वो युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है। पढ़ा लिखा युवा ही सही फैसले ले सकता है और उसी को अपने अवाम के लिए अच्छे और बुरे का फर्क पता चलता है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वह अपने मत का इस्तेमाल करें।
बिलाल ने कहा कि इस बार के चुनाव में युवा पीढ़ी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रही है। अगर बदलाव लाना है तो मतदान जरूरी है। अगर हमारा चुना हुआ उम्मीदवार आएगा तो विकास करेगा और युवाओं की बड़ी समस्या बेरोजगारी को भी कुछ कम कर पाएगा। बिलाल ने कहा कि हम बदलाव चाहते हैं, क्योंकि इससे पहले जो वंशवाद की राजनीति यहा चल रही थी उससे गिने चुने लोगों को फायदा पहुंचाया जाता था। उन्होंने युवाओं के लिए कुछ नहीं किया, केवल अपने लिए ही काम करते आए हैं।
वहीं आदिल नाम के एक अन्य युवा ने बताया कि वह पहली बार वोट डालने पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने मसलों का हल चाहते हैं तो हमें मतदान करना चाहिए। आदिल के अनुसार चुनाव बहिष्कार से कुछ नहीं होता है उल्टा ऐसा कोई उम्मीदवार चुनकर सामने आता है जो हमारे लिए सही नहीं होता।
उन्होंने कहा कि इस बार युवा बढ़चढ़ कर इन चुनावों में भाग ले रहे हैं क्योंकि वे बदलाव चाहते हैं। आदिल ने कहा कि इससे पहले बहिष्कार किया जाता था और अपना वोट जाया करते थे और वे लोग चुनकर सामने आते थे जो पीढ़ियों से यहां राज करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपना वोट जाया नहीं करना चाहिए और साथ ही पढे़-लिखे युवाओं को ही उम्मीदवार बनकर कमान अपने हाथ में लेनी चाहिए। जानकारी के अनुसार घाटी की करीब 65 से 70 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोगों की है।