हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पिछली बरसात में आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं को वैज्ञानिकों ने हिमाचल में उभरता हुआ नया आपदा पैटर्न करार दिया है। सीमित क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा और कुछ ही घंटों में व्यापक तबाही ने पारंपरिक चेतावनी प्रणाली को अप्रभावी साबित किया है। इसी चुनौती को देखते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का आपदा अध्ययन केंद्र इटली और नॉर्वे के तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर नई पूर्व चेतावनी और त्वरित विकसित करने में जुट गया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, इटली के पदोवा विश्वविद्यालय और नॉर्वे के तकनीकी संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापनों के तहत आपदाओं की पूर्व चेतावनी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर संयुक्त शोध किया जा रहा है। मंडी में हुई घटनाओं को अध्ययन का मुख्य आधार बनाकर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में अचानक बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाएं एक साथ घटित होती हैं और उनका प्रभाव क्षेत्र इतनी तेजी से कैसे फैलता है। एचपीयू के आपदा अध्ययन केंद्र से जुड़े वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि मंडी में हुई तबाही केवल वर्षा की मात्रा का परिणाम नहीं थी।