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हिमाचल: मंडी में आई आपदा से सबक, नई पूर्व चेतावनी प्रणाली होगी विकसित

Thu, 08 Jan 2026 01:10 PM IST
Krishan Singh हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

मंडी जिले में पिछली बरसात में आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं को वैज्ञानिकों ने हिमाचल में उभरता हुआ नया आपदा पैटर्न करार दिया है।
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मंडी आपदा(फाइल) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पिछली बरसात में आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं को वैज्ञानिकों ने हिमाचल में उभरता हुआ नया आपदा पैटर्न करार दिया है। सीमित क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा और कुछ ही घंटों में व्यापक तबाही ने पारंपरिक चेतावनी प्रणाली को अप्रभावी साबित किया है। इसी चुनौती को देखते हुए हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का आपदा अध्ययन केंद्र इटली और नॉर्वे के तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर नई पूर्व चेतावनी और त्वरित विकसित करने में जुट गया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, इटली के पदोवा विश्वविद्यालय और नॉर्वे के तकनीकी संस्थानों के बीच हुए समझौता ज्ञापनों के तहत आपदाओं की पूर्व चेतावनी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर संयुक्त शोध किया जा रहा है। मंडी में हुई घटनाओं को अध्ययन का मुख्य आधार बनाकर यह समझने का प्रयास किया जा रहा है कि किन परिस्थितियों में अचानक बाढ़ और बादल फटने जैसी घटनाएं एक साथ घटित होती हैं और उनका प्रभाव क्षेत्र इतनी तेजी से कैसे फैलता है। एचपीयू के आपदा अध्ययन केंद्र से जुड़े वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि मंडी में हुई तबाही केवल वर्षा की मात्रा का परिणाम नहीं थी।

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पहाड़ी ढलानों की बनावट, नदी तंत्र में अचानक बढ़ा जल प्रवाह, भूगर्भीय कमजोरियां और स्थानीय तापमान की भूमिका ने मिलकर इस आपदा को जन्म दिया। वैज्ञानिक दृष्टि से इसे हिमाचल में उभरता हुआ नया आपदा स्वरूप माना जा रहा है, जिसमें चेतावनी और प्रतिक्रिया का समय बेहद सीमित रह जाता है। शोध के तहत मौसम विभाग के पूर्वानुमान, अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों से मिलने वाले वर्षा आंकड़े और वास्तविक समय में उपलब्ध आंकड़ों को एकीकृत कर चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर काम हो रहा है। इस प्रणाली से यह आकलन किया जा सकेगा कि किसी संभावित घटना में किस स्तर तक नुकसान हो सकता है और किन क्षेत्रों को तुरंत खाली कराना आवश्यक होगा।
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जानमाल के नुकसान को किया जा सकेगा कम
इस शोध का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि समय रहते चेतावनी मिलने पर राहत और बचाव दल, पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं को पहले से तैयार किया जा सकेगा। हिमाचल जैसे पर्वतीय प्रदेश में यह प्रणाली लागू होने पर जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय स्तर पर चल रहा यह शोध भविष्य में प्रदेश की आपदा प्रबंधन नीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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