केंद्र सरकार के अंतरिम बजट पर हिमाचल के विभिन्न दलों के नेताओं, सरकार के मंत्रियों ने प्रतिक्रियाएं दीं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने अंतरिम बजट को आज तक का सबसे बढ़िया बजट बताया।
धूमल ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना लाई गई है जिसके तहत 75 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। इस योजना के तहत पांच एकड़ तक भूमि वाले किसान के खाते में प्रति वर्ष छह हजार रुपये सरकार की ओर से जमा कराए जाएंगे।
बजट में 5 लाख तक की आय को कर मुक्त कर सबसे बड़ी राहत मध्य वर्गीय लोगों को दी गई है। देश की रक्षा के लिए 3 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, वह भी ऐतिहासिक है। भूतपूर्व सैनिकों का, वर्तमान सैनिकों का और उनके हितों का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
अंतरिम बजट में प्रत्येक वर्ग को राहत : शांता
कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र से सांसद शांता कुमार ने कहा कि देश का वर्तमान अंतरिम बजट प्रत्येक वर्ग के लिए राहत लेकर आया है। किसानों और संगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए आय के स्रोत बढ़ाने का निर्णय वर्तमान सरकार का सही फैसला है।
शांता ने कहा कि वर्तमान सरकार ने छोटे और सीमांत किसानों को 6000 रुपये वार्षिक सीधी नकद सहायता देकर देश के अन्नदाता की तकलीफें कम करने का प्रयास किया है।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन का प्रावधान कर सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शांता कुमार ने कहा कि वेतनभोगी कर्मचारियों को इनकम टैक्स में बड़ी राहत एक और संतोषजनक निर्णय है।
बजट में झलकी पीएम की दूरदर्शिता : रामस्वरूप
केंद्रीय बजट चुनावी स्टंट, हिमाचल की अनदेखी : कौल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने केंद्रीय बजट को चुनावी स्टंट करार दिया है। उन्होंने इस बजट को निराशाजनक बताया है। कहा कि इस बजट में विशेष तौर पर हिमाचल की अनदेखी की गई है। हिमाचल के हितों की कोई रक्षा नहीं की गई है। रेलवे के लिए कोई बजट का प्रावधान नहीं किया गया है।
सांसद राम स्वरूप शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट ऐतिहासिक है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता झलक रही है। देश के मजदूरों, किसानों और युवाओं को बजट में दिल खोलकर सौगात बरसाई है। विरोधी खेमा भी इस ऐतिहासिक बजट को सुनकर खामोश है। मोदी सरकार 2019 के चुनावों में दोबारा सत्ता में आएगी।
बजट में सभी वर्गों के लिए राहत : गोविंद
वन, परिवहन, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने केंद्रीय बजट को समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी बताया है। उन्होंने कहा कि बजट में किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाएं प्रस्तुत की गईं, वहीं असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से फायदा होगा।
मध्य वर्गीय करदाताओं को मोदी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी राहत दी है। मोदी सरकार में 2014 के बाद न्यूनतम दिहाड़ी में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, 6 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं, 34 करोड़ बैंक खाते जनधन योजना के तहत खोले हैं।
गुमराह करने वाला है अंतरिम बजट : संजय
माकपा के सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने कहा कि जनता पांच साल पहले किए वायदों जिनमें 15 लाख हर खाते में और दो करोड़ रोजगार का इंतजार करती रही पर मिला कुछ नहीं। अंतरिम बजट भी चुनाव को ध्यान में रखकर जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
मोदी सरकार ने देश में बेरोजगारी व कृषि संकट को चरम पर ले जाने का काम किया है। किसानों को मात्र 500 रुपये प्रति माह का प्रावधान कर संकटग्रस्त किसानों से भद्दा मजाक है।
मजदूर आज न्यूनतम वेतन 18 हजार की लड़ाई लड़ रहा है। कर्मचारी अपनी पेंशन के हक के लिए अभी भी संसद के बाहर संघर्ष कर रहा है। रेल बजट में हिमाचल प्रदेश की पूरी तरह से अनदेखी की गई है।
किसानों को सम्मान की बजाय अपमान मिला : तंवर
हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि किसानों से किए वायदों को दरकिनार कर अंतरिम बजट में उनसे धोखा किया है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानाें को प्रतिदिन 16.43 रुपये देने की घोषणा किसानों का सम्मान नहीं बल्कि उनका अपमान है। 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने का राग अलापने वाली भाजपा सरकार किसानों को चुनावी साल में जिस तरह से लुभाने की कोशिश कर रही है, वह बहुत खेदजनक है।
अंतिम जुमला साबित होगा आम बजट : राठौर
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि केंद्रीय अंतरिम बजट आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अंतिम जुमला साबित होगा। बजट से आम आदमी और किसान निराश हैं।
किसानों के लिए आय के समर्थन में 6000 रुपये की प्रोत्साहन राशि एक गरीब किसान परिवार से बड़ा मजाक है। हिमाचल प्रदेश बजट में पर्यटन, बागवानी के लिए पूरी तरह से उपेक्षित है। राज्य के कठिन इलाकों में कृषि के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं दिया है।
सरकार को पहले के बजट के वादों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, क्योंकि अब तक कोई स्मार्ट शहर नहीं आया है, न ही स्टार्ट अप हुआ है। 23 प्रतिशत जनधन खाते भी निष्क्रिय हैं। सरकार ने कभी भी उन कार्यक्रमों को शुरू नहीं किया है, जो उनके गेम चेंजर कार्यक्रमों के रूप में विज्ञाप्त हुए हैं।
लोगों की आशाओं पर खरा उतरने वाला बजट : सत्ती
केंद्रीय बजट विकासोन्मुख : परमार
स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने केंद्र सरकार के अंतरिम बजट को विकासोन्मुख करार दिया है। उन्होंने कहा कि अंतरिम बजट में किसान, नौकरीपेशा, पशुपालकों, मजदूरों व समाज के सभी वर्गों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। किसानों को सालाना 6000 रुपये देने का वादा किया गया और ये पैसा सीधा उनके बैंक खातों में जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसान लाभान्वित होंगे।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बजट को सकारात्मक और देश के सभी वर्गों की आशाओं व अकांक्षाओं पर खरा उतरने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि टैक्स में छूट देकर जहां सरकार ने मध्य वर्गीय जनता का दिल जीत लिया, वहीं किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू कर किसान हितैषी होना भी साबित किया है। कहा कि सरकार के इन दोनों ही फैसलों से हिमाचल को फायदा होगा क्योंकि प्रदेश में दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों की संख्या काफी ज्यादा है।
बजट डूबते जहाज को बचाने का प्रयास : सिंघा
माकपा विधायक राकेश सिंघा ने अंतरिम बजट को केंद्र सरकार के डूबते जहाज को बचाने के लिए किया गया असफल प्रयास करार दिया है। उन्होंने कहा कि कामगारों, युवाओं, महिलाओं, किसानों-बागवानों और मध्य वर्गीय परिवारों को बजट से कुछ भी राहत नहीं मिली है।
किसानों को छह हजार रुपये की वार्षिक आय समर्थन की घोषणा मात्र छलावा है। इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार किसानों के हित को लेकर बिलकुल भी गंभीर नहीं है।
मजदूर विरोधी है केंद्र का बजट : विजेंद्र
मजदूर यूनियन सीटू के राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने केंद्र सरकार के अंतरिम बजट को मजदूर विरोधी और पूंजीपतियों के पक्ष में करार दिया है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की 18 हजार रुपये वेतन की मांग पूरी न करना इसका उदाहरण है।
जो पेंशन में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है, उसमें भी प्रदेश के लगभग 18 लाख असंगठित व संगठित क्षेत्र के मजदूरों में से केवल 10 प्रतिशत मजदूरों को ही फायदा मिलेगा।
आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा वर्कर्स, मनरेगा, निर्माण, आउटसोर्स व औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों की पूर्ण अनदेखी हुई है। बजट नई पेंशन नीति को खत्म कर पुरानी पेंशन नीति बहाल करने पर भी खामोश है। बजट केवल चुनावी स्टंट है व निराशाजनक है।
बजट से उद्योगपतियों के हाथ लगी निराशा
केंद्र के अंतरिम बजट से प्रदेश के उद्योगपतियों के हाथ ज्यादा कुछ नहीं आया है। बजट में बद्दी और लेह रेल लाइन के लिए भी कोई खास सौगात न मिलने से उद्योग जगत निराश है। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक संगठन बीबीएनआईए के अध्यक्ष शैलेष अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार का बजट लोक लुभावन है और मिडल क्लास के लोगों के लिए यह राहत देने वाला है। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिलेगा और लेबर क्लास के हित में यह बजट है। बजट उद्योगपतियों के लिए बड़ी कोई सौगात नहीं लाया है।
बजट का भविष्य में होगा असर : खुराना
सूक्ष्म मध्यम उद्यम के चेयरमैन संजय खुराना ने कहा कि अंतरिम बजट दूरगामी है और 8-10 बिंदुओं का विजन डाक्यूमेंट भविष्य में अच्छे इंपैक्ट लाएंगे, लेकिन उद्योग जगत के लिए कुछ खास तोहफा नहीं मिला है। छोटे व मध्यम वर्ग को लाभ देने से इसका अप्रत्यक्ष रूप से उद्योगों को लाभ मिलेगा, जिससे खपत बढ़ेगी व उत्पादन में लाभ मिल सकता है।