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बजट से उम्मीद: हिमाचल में नए उद्योग लाओ पर बुनियादी ढांचा भी मजबूत हो

Sat, 02 Feb 2019 10:33 AM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन काला/संतोष कुमार, अमर उजाला, शिमला/नालागढ़ (सोलन)
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प्रदेश सरकार के दूसरे वार्षिक बजट से हिमाचल के उद्योग जगत को कई उम्मीदें हैं। पिछले बजट में घोषित 80 फीसदी कार्य पूर्ण होने से उद्योगपति थोड़ा संतुष्ट हैं, लेकिन आशा है कि इस बार के बजट में सरकार उद्योगों के लिए मूलभूत सुविधाओं की ओर फोकस जरूर करेगी। जयराम सरकार धर्मशाला में 10-11 जून को इन्वेस्टर मीट को सफल बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती।

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सरकार का लक्ष्य देश-विदेश के पूंजीपतियों को आकर्षित कर हिमाचल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 85 हजार करोड़ का निवेश जुटाने का है। बंगलूरू और हैदराबाद के रोड शो में 150 कंपनियां निवेश की इच्छा जता चुकी हैं। लेकिन बड़े पूंजीपतियों को उद्योग स्थापित करने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करना अनिवार्य है। सरकार उद्योगों के विकास के साथ प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार जुटाना चाहती है।   

एशिया के मानचित्र पर ख्याति पा चुके और अपना नाम फार्मा हब के रूप में विकसित कर चुके बीबीएन में आज भी कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर है। उद्योग जगत का कहना है कि पुराने और नए उद्योगों के लिए भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करके उन्हें यहां निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 63 फीसदी प्रदेश को राजस्व देने वाले इस औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए वर्ष 2003 में गठित बीबीएनडीए को मात्र 42 करोड़ का बजट सड़कों सहित अन्य विकास कार्यों के लिए आता है, जो कि नाकाफी है।
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राज्य के अन्य जिलों ऊना, पांवटा, डमटाल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की सड़कें खस्ताहाल हैं। इन सड़कों में जाम आम बात है। नए औद्योगिक घराने यहां निवेश करने से पहले कमजोर बुनियादी ढांचा देखकर बैकफुट में चले जाते हैं। इस बार के बजट में सरकार से इस क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं पर फोकस करने की मांग उठाई है।

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सरकार को दिया गया है प्री बजट मेमोरेंडम : शैलेश

औद्योगिक संगठन बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ उद्योग संघ (बीबीएनआईए) के अध्यक्ष शैलेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार को प्री बजट मेमोरेंडम दिया है। इसमें सबसे अधिक बल बीबीएन सहित अन्य उद्योगों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने पर दिया है। औद्योगिक क्षेत्रों के बजट में इजाफा करके उसे एकमुश्त दिया जाना चाहिए। बाहरी प्रदेशों को बिजली सस्ती दरों पर बेची जाती है, जो कि बिक नहीं रही। इसे विद्युत उद्योगों को दे, जिससे सरकार और उद्योगों को दोनों को लाभ होगा।   

दवा निर्माताओं को सुविधाएं नहीं, जीएसटी रिफंड अटका : गुप्ता 
हिमाचल दवा निर्माता संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि सबसे अधिक इस क्षेत्र में मूलभूत सुविधा की कमी अखरती है। सरकार बीबीएन के इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर ध्यान दे। नए उद्योग लगाने के लिए यह बहुत जरूरी है। प्रदेश में दर्जनों नए फार्मा उद्योग यहां स्थापित हो रहे हैं। अकेले फार्मा उद्योगों का पांच करोड़ प्रतिमाह माह का जीएसटी रिफंड अटका हुआ है। सरकार इसे तत्काल क्लीयर कर फार्मा सहित अन्य उद्योगों को राहत दे। नए उद्योग लगाने की प्रक्रिया तेज हो। औद्योगिक क्षेत्रों का बीबीएन क्षेत्र के सौंदर्यीकरण की बेहद आवश्यकता है।  

बेरोजगारी का समाधान निकाले सरकार : बतरा 
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष संजय बतरा ने कहा कि प्रदेश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी की है, जिसके लिए सरकार को कुछ सोचना होगा। सरकार युवाओं को प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर वित्तीय सहयोग करे। युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं। उद्योगपतियों को विश्वास है कि इस बार के बजट में भी उद्योग जगत को सरकार राहत पहुंचाएगी।

निवेश के लिए कहां कितना लैंड बैंक 
पूंजीपतियों को लुभाने के लिए सरकार ने कांगड़ा, ऊना और सोलन में 750 एकड़ भूमि में लैंड बैंक तैयार कर दिया है। इसके अलावा सरकार 650 एकड़ भूमि हस्तांतरित करके ऊना और कांगड़ा में दूसरी लैंड बनाने की तैयारी की जा रही है। इन लैंड बैंकों में सड़कें, बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करने को बजट के उचित प्रावधान की जरूरत है।
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