वहीं, पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब ने शानदार बढ़त बनाते हुए प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है। उत्तराखंड भी मामूली अंतर से हिमाचल से आगे निकल गया है। केंद्र सरकार के मिशन कर्मयोगी के तहत संचालित कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर जारी यह रैंकिंग सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की डिजिटल लर्निंग, प्रशिक्षण में भागीदारी और क्षमता निर्माण से जुड़ी गतिविधियों के आधार पर तैयार की जाती है। जुलाई में प्रदेश ने 51.56 अंकों के साथ गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल किया था। उस समय गुजरात 51.18 अंकों के साथ दूसरे और कर्नाटक 40.47 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर था।
पंजाब 40.06 अंकों के साथ पांचवें, उत्तराखंड 34.49 अंकों के साथ छठे और हरियाणा 30.71 अंकों के साथ दसवें स्थान पर था। लेकिन सितंबर की रैंकिंग में हरियाणा ने 60.03 अंकों के साथ पहला और पंजाब ने 60 अंकों के साथ चौथा स्थान हासिल किया। उत्तराखंड 51.03 अंकों के साथ छठे स्थान पर पहुंच गया, जबकि हिमाचल 51 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहा। रैंकिंग में आई इस गिरावट के बीच प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों की डिजिटल लर्निंग और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं।
कार्मिक विभाग की ओर से प्रदेश कैडर के सभी आईएएस अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। हर आईएएस अधिकारी को प्रतिमाह एक घंटा कर्मयोगी पोर्टल पर डिजिटल लर्निंग के लिए देना अनिवार्य होगा। पद, कार्यक्षेत्र और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चुनकर उन्हें नियमित रूप से पूरा भी करना होगा। साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।