हिमाचल प्रदेश उदय योजना में शामिल होने वाला देश का 18वां राज्य बन गया है। वीरवार को नई दिल्ली में हिमाचल सरकार ने केंद्र सरकार के साथ योजना को लेकर एमओयू साइन किया। केंद्र सरकार की उदय योजना में शामिल होने से हिमाचल के बिजली बोर्ड की हालत सुधरेगी। अब बोर्ड का 75 फीसदी ऋण राज्य सरकार वहन करेगी। इस ऋण पर बोर्ड द्वारा प्रति वर्ष दिए जा रहे करीब 140 करोड़ के ब्याज की भी बचत होगी।
प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा तरुण श्रीधर और बिजली बोर्ड के प्रबंध निदेशक पीसी नेगी ने केंद्र सरकार के साथ एमओयू साइन किया। उदय योजना में शामिल होने से हिमाचल को 823 करोड़ का लाभ होगा। तीन पक्षीय एमओयू में बिजली बोर्ड को सबसे ज्यादा लाभ होगा।
राज्य सरकार बिजली बोर्ड के 75 फीसदी ऋणों को सीधे तौर पर वहन करेगी। बोर्ड के 3554 करोड़ के ऋण में से 2891 करोड़ का ऋण राज्य सरकार वहन करेगी। 25 फीसदी ऋण बोर्ड का बचेगा। इस ऋण को बांड के माध्यम से जारी किया जाएगा। पुरानी ब्याज दरों के मुकाबले तीन फीसदी कम दर पर बोर्ड के ऋणों का भुगतान हो सकेगा।
उदय योजना के लागू होने के बाद बोर्ड के ऋण को राज्य सरकार सस्ती दरों पर वहन करेगी। इससे बोर्ड को बड़ी राहत मिलेगी। राज्य सरकार को भी केंद्र की ओर से बिजली की सभी योजनाओं का लाभ भी बेहतर तरीके से मिल सकेगा। योजना के तहत हिमाचल को अपने ट्रांसमिशन नुकसान को भी कम करना होगा। अभी हिमाचल में ट्रांसमिशन नुकसान 12.75 फीसदी है। इस नुकसान को 3.5 फीसदी तक लाना होगा।