उन्होंने कहा कि इस संपत्ति से जुड़े कानूनी मामले में मिली सफलता का श्रेय पूर्ववर्ती सरकारों और भाजपा सरकार के प्रयासों को जाता है, लेकिन वर्तमान सरकार इसका राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है। जयराम ने दावा किया कि न्यायालय का फैसला करीब ढाई वर्ष पहले आ चुका था, लेकिन मामले को जानबूझकर लंबित रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब टेंडर प्रक्रिया में भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार पहले भी कई संपत्तियां बेच चुकी है। अब राज्य पर्यटन विकास निगम की 18 संपत्तियों एवं होटलों को निजी क्षेत्र को सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं। भाजपा कर्मचारियों और प्रदेश हितों की रक्षा के लिए इस निर्णय का विरोध जारी रखेगी।