स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि पैरासिटिक वॉर्म्स और सॉयल ट्रांसमिटेड हेल्मिंथ (एसटीएच) फॉलोअप सर्वेक्षण में हिमाचल विश्व भर में अव्वल रहा है। प्रदेश में 1 से 19 आयु वर्ग के बच्चों की सैंपल जांच में 0.3 प्रतिशत वॉॅर्म्स ही पाए गए हैं।
सैंपल जांच के लिहाज से बच्चों में यह औसत दुनिया भर में सबसे कम है। स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को एसटीएच फॉलोअप सर्वेक्षण की रिपोर्ट और निष्कर्षों की जानकारी देने के लिए आयोजित समारोह में यह जानकारी दी।
उन्होंने डिवार्मिंग कार्यक्रम से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, शहरी विकास और ग्रामीण विकास विभाग जैसे अन्य विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। कहा कि राष्ट्रीय डिवार्मिंग कार्यक्रम वर्ष 2015 में शुरू किया गया था।
आयुष्मान भारत विश्व की सबसे बड़ी राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना है। इसके बाद हिमकेयर योजना भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि 1 मई, 2019 को 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों और आंगनबाड़ी में बच्चों को एलबेंडाजोल दवाई दी गई है।
प्रदेश में 98 प्रतिशत बच्चों की डिवार्मिंग की गई है। गैर सरकारी संगठन एविडेंस एक्शन, कंट्री डायरेक्टर डॉ. प्रिया झा ने सर्वेक्षण पर प्रस्तुति दी। कहा कि राज्य के पांच जिलों से 942 बच्चों के सैंपल लिए गए। इनमें केवल तीन बच्चों को एसटीएच के लिए पॉजिटिव पाया गया, जो विश्व में सबसे कम है।