जब तक उपभोक्ता की शिकायत का निवारण नहीं हो जाता, तब तक शिकायत एप में दिखाई देेती रहेगी। जेई के पास विभाग से मिले टैब रहेंगे और उनके पास भी शिकायतें सीधे पहुंचेंगी। एप से की गई शिकायत का निवारण किया जाता है तो इसे एप से संबंधित उपभोक्ता ही हटा सकेगा।
सचिव देवेश कुमार ने कहा कि आईपीएच विभाग की इस एपको तैयार करने के लिए लखनऊ की एक फर्म को जिम्मा सौंपा है। इसके लिए कंपनी को टेंडर दे दिया गया है। इसके बाद अब कंपनी एपतैयार करके आईपीएच विभाग को देगी।
इस एप से उपभोक्ता शिकायतें कर सकेंगे। उनका कहना है कि अधिकारी इन शिकायतों पर पैनी नजर भी रखेंगे और अगर कोई जेई दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जा सकेगी।