प्रदेश अपनी कुल संभावित क्षमता का करीब 52.6 प्रतिशत ही दोहन कर पाया है। ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 189 जल विद्युत परियोजनाएं चालू हैं, जबकि 54 परियोजनाएं निर्माणाधीन या विभिन्न स्तरों पर अटकी हुई हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि 530 परियोजनाएं और 7,623.61 मेगावाट बिजली क्षमता अभी भी क्लीयरेंस, आवंटन अथवा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी हुई है। जल विद्युत विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अधिक रही है।
निजी क्षेत्र में 40 परियोजनाओं के माध्यम से 2,890.51 मेगावाट क्षमता विकसित की जा चुकी है, जबकि 10 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। वहीं 5 मेगावाट तक की छोटी परियोजनाओं में 110 परियोजनाएं चालू हैं, लेकिन इनकी कुल क्षमता केवल 367.77 मेगावाट है। केंद्रीय और संयुक्त उपक्रमों ने 13 परियोजनाओं के जरिए 8,311.73 मेगावाट क्षमता विकसित की है, जो राज्य की कुल स्थापित क्षमता का बड़ा हिस्सा है।