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Lahaul Tragedy: मौत के बाद भी मां ने नहीं छोड़ा छह माह की बेटी का साथ, मलबे में सीने से लगाकर मिली मासूम

Sun, 26 Jul 2026 10:36 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, पांगी/चंबा।

सार

लाहौल-पांगी सीमा पर हुए भीषण हादसे में उदयपुर के छालिंग गांव की सोनम आगमो और उनकी छह माह की बेटी की मौत हो गई। राहत कार्य के दौरान मां अपनी मासूम बेटी को सीने से लगाए मिलीं। इस मार्मिक दृश्य ने राहत दल और स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया। हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का चंद्रभागा नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया गया।
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मासूम बिटिया और धर्मपत्नी की जब अर्थी उठी तो छेरिंग दोरजे फूट-फूटकर रो पड़े। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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लाहौल-पांगी सीमा पर हुए भीषण भूस्खलन हादसे ने पूरे हिमाचल को गमगीन कर दिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाली उदयपुर के छालिंग गांव की सोनम आगमो और उनकी छह माह की मासूम बेटी की कहानी हर किसी की आंखें नम कर रही है। राहत एवं बचाव दल जब मलबा हटा रहा था, तब मां अपनी मासूम बेटी को सीने से कसकर लगाए हुए मिलीं। मौत भी मां की ममता को अपनी बेटी से अलग नहीं कर सकी।
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मायके जा रही थीं सोनम
जानकारी के अनुसार सोनम आगमो अपने पति छेरिंग दोरजे के साथ उदयपुर के छालिंग गांव में रहती थीं। वह अपनी छह माह की बेटी को गोद में लेकर अपने मायके परमार गांव (पंचायत भटोरी) जा रही थीं। इसी दौरान लाहौल-पांगी सीमा पर कडू नाला के पास अचानक पहाड़ी दरक गई और भारी चट्टानें व मलबा टैक्सी पर आ गिरा। हादसे में मां-बेटी समेत वाहन में सवार कई लोग मलबे में दब गए।
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राहत दल भी हो गया भावुक
जब राहत दल ने घंटों की मशक्कत के बाद मलबा हटाया तो सामने आए दृश्य ने हर किसी को झकझोर दिया। सोनम आगमो अपनी छह माह की बेटी को सीने से लगाए हुए थीं। यह मार्मिक दृश्य देखकर राहतकर्मी, पुलिस और स्थानीय लोग भी भावुक हो उठे।
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एक साथ उठीं मां-बेटी की अर्थियां
मां और बेटी के शवों को उनके पैतृक गांव छालिंग लाया गया, जहां दोनों की एक साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव में एक साथ उठीं मां और मासूम की अर्थियों ने हर किसी की आंखें नम कर दीं। परिजनों का विलाप और ग्रामीणों की सिसकियां पूरे माहौल को गमगीन कर गईं।

11 मृतकों का चंद्रभागा किनारे अंतिम संस्कार
इस हादसे में जान गंवाने वाले 11 लोगों का शनिवार को उनके पैतृक गांवों में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से सभी को अंतिम विदाई दी। आरसी पांगी अमनदीप सिंह ने बताया कि मृतकों का अंतिम संस्कार चंद्रभागा नदी के किनारे पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया।
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