हाईकोर्ट ने परवाणू से शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तारीकरण के चलते मलबा सड़क पर फेंकने पर कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने प्रधान अरण्यपाल, वन निगम के प्रबंध निदेशक, बिजली बोर्ड के कार्यकारी निदेशक, उपमंडल अधिकारी शिमला, सोलन और वन मंडल अधिकारी सोलन व शिमला को तलब करने के आदेश जारी किए।
मामले पर वीरवार को दोबारा सुनवाई होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ को विस्तारीकरण के कार्य से जुड़े ठेकेदार ने बताया कि उसे मलबे की डंपिंग के लिए पर्याप्त स्थान मुहैया नहीं करवाया जा रहा है।
मलबे की डंपिंग को पर्याप्त स्थान उपलब्ध न होने के कारण इसे सड़क पर ही रखना पड़ रहा है। बारिश के कारण बहने से न केवल पर्यावरण को खतरा पैदा हो रहा है, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था भी बिगड़ रही है।
अवैध कब्जों के कारण लोग गाड़ियां सड़क पर ही पार्क करवाते हैं, जिससे इस क्षेत्र में हमेशा जाम लगा रहता है। कोर्ट ने इन शिकायतों के मद्देनजर अधिकारियों को कोर्ट में तलब किया है।