आपराधिक मामले में दर्ज प्राथमिकी के परिणाम का रिकॉर्ड नहीं रखने पर अदालत ने खेद जताया है। अदालत ने सत्र न्यायाधीश किन्नौर और एसपी शिमला को इस मामले में जांच करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने 11 जुलाई को जांच रिपोर्ट तलब की है। याचिकाकर्ता भगवान सिंह के खिलाफ 32 वर्ष पहले 1991 में पुलिस थाना झाकड़ी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 323 और 506 के तहत सक्षम अदालत में अभियोग चलाया गया था। 21 जुलाई 1994 को अभियोग साबित न होने पर याचिकाकर्ता को बरी कर दिया था।
इसके बाद उन्हें 23 अप्रैल 1996 को तहसीलदार रामपुर ने चरित्र प्रमाण पत्र भी जारी किया था। वर्ष 2021 में उन्हें डाक विभाग में मल्टी टास्क भर्ती में भाग लेने के लिए दोबारा से चरित्र प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ी। याचिकाकर्ता को 7 जनवरी 2021 को चरित्र प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें दर्शाया गया कि उनके खिलाफ प्राथमिकी संख्या 289/91 पुलिस थाना झाकड़ी में दर्ज है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने पुलिस व कोर्ट से उक्त प्राथमिकी की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी। बताया गया कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के परिणाम का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले की जांच और अपने चरित्र प्रमाण पत्र में दुरुस्ती करवाने के आदेशों की गुहार लगाई है।