हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नदियों और खड्डों से अवैध खनन के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने उपायुक्त ऊना को आदेश दिए हैं कि वह शपथपत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि गरनी खड्ड के किनारे स्थापित क्रशर कितना दूर है। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 13 सितंबर को निर्धारित की है। जनहित में दायर याचिका की सुनवाई के बाद अदालत ने यह आदेश पारित किए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन के कारण ऊना स्थित गरनी खड्ड का पानी सूख रहा है।
समय- समय पर पारित आदेशों की अनुपालना में अदालत को बताया गया कि प्रदेश भर में 44,400 हेक्टेयर क्षेत्र में से सिर्फ 2,350 हेक्टेयर को खनन के लिए स्वीकृत किया गया है। अदालत ने उपायुक्त ऊना को आदेश दिए हैं कि स्वां नदी के किनारे दिए गए खनन क्षेत्र की दूरी से भी अदालत को अवगत करवाएं। वर्ष 2017 में दायर इस जनहित याचिका में मुख्य सचिव ने अदालत को बताया था कि नदियों के किनारों से खनन किए जाने के लिए पहले लीज पर दिया जाता था। इससे अवैज्ञानिक तरीके से खनन होने लगा। अवैध और अवैज्ञानिक खनन को रोकने के लिए अब नीलामी के जरिये चिन्हित स्थान को खनन के लिए दिया जाता है।
आपदा के बीच राहत राशि के एवज में रिश्वत के कथित आरोपी को सशर्त जमानत मिल गई है। राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर राकेश शर्मा की जमानत याचिका को जिला अदालत ने स्वीकार किया है। विशेष न्यायाधीश अमन सूद की अदालत ने याचिकाकर्ता को दो लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता पर शर्त लगाई गई है कि वह पुलिस जांच में सहयोग करेगा और किसी भी तरह से गवाहों और साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेगा। अदालत ने अभियोजन पक्ष को छूट दी है कि यदि याचिकाकर्ता शर्तों का उल्लंघन करता है तो वह जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। याचिकाकर्ता के खिलाफ सतर्कता विभाग ने रिश्वत लेने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की है और उसे 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने पीड़ित परिवार से राहत राशि के एवज में 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।