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धर्मशाला में पेड़ काटकर भवन निर्माण पर हिमाचल हाईकोर्ट की रोक

Sat, 07 Jul 2018 12:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट ने धर्मशाला नगर निगम क्षेत्र में पेड़ काटकर भवन निर्माण पर रोक लगा दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि अगर आदेशों की अक्षरश अनुपालना नहीं की गई तो संबंधित अफसरों का वेतन रोक दिया जाएगा।

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कोर्ट ने कहा कि पुराने आदेशों पर अमल नहीं हुआ है। धर्मशाला शहर में साल 2010 से नियुक्त टीसीपी और नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों के नामों की सूची भी तलब की है। मामले पर आगामी सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

हाईकोर्ट ने नगर निगम धर्मशाला के आयुक्त को आदेश दिए हैं कि वह सुनिश्चित करें कि उस क्षेत्र में निर्माण गतिविधि बिल्कुल न हो जहां पर पेड़ हों। उन्हें कोर्ट की अनुमति के बिना निर्माण कार्य करने की मंजूरी न दी जाए।
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न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2015 के बाद हाईकोर्ट ने कई बार निर्देश जारी किए ताकि अवैध पेड़ों के कटान पर रोक लगाई जा सके। न्यायालय के आदेशों के बाद अवैध तरीके से किए गए निर्माणों को हटाया गया।

न्यायालय ने खेद जताया कि वर्ष 2015 के बाद जिन लोगों को गलत तरीके से निर्माण कार्य करने की अनुमति प्रदान कर दी, उनके खिलाफ  कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।

न्यायालय ने यह भी पाया कि निजी लोग पेड़ों को उखाड़ने के लिए तरह-तरह के तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि पर्यावरण की दृष्टि से पेड़ों का होना अति आवश्यक है। न्यायालय ने खेद जताया कि धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना था।

लेेकिन धर्मशाला में यूं पेड़ों का काटा जाना पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है और नगर निगम द्वारा अवैध तरीके से हो रहे कटान पर रोक लगाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया गया।

प्रदेश उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश कांगड़ा को सुनिश्चित करने के आदेश दिए कि जितने भी पानी के और बिजली के कनेक्शनों को काटे जाने से संबंधित मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े हैं, उनका निपटारा शीघ्र हो ताकि हाई कोर्ट के पारित आदेशों की अनुपालना करने में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।

न्यायालय ने खेद जताया कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना करने में अधिकारियों का रवैया उदासीन हैं। इसका क्या कारण है, इस बारे में आज तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने प्रधान सचिव टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को आदेश दिए हैं कि वह अपने शपथ पत्र के माध्यम से यह बताएं कि उन्होंने धर्मशाला में कोर एरिया को मिक्स

लैंड यूज एरिया में क्यों तबदील किया। यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि धर्मशाला में इस बाबत निर्णय लेने के दौरान क्या इन तथ्यों को भी ध्यान में रखा गया था कि यह क्षेत्र भूकंप का केंद्र बिंदु है। इस बाबत 2 सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं।


101 को दिए नोटिस, 40 कनेक्शन काटे- न्यायालय को प्रदेश महाधिवक्ता की ओर से बताया गया कि लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर 31 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 70 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। 40 लोगों के बिजली और पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं।

जिन्हें मंजूरी नहीं दी, उन्होंने भी काट दिए पेड़- न्यायालय द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर देवेन खन्ना ने न्यायालय को बताया कि धर्मशाला क्षेत्र में पेड़ को काटने का डर न केवल लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क बनाने के कारण है बल्कि उस क्षेत्र में कुछ निजी लोग निर्माण की गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।

न्यायालय के ध्यान में यह भी तथ्य लाया गया कि जिन लोगों को नगर निगम द्वारा पेड़ों को गिराने की अनुमति नहीं दी गई थी, उन लोगों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसकी वजह से पेड़ों की जड़ें खोखली हो गई है और पेड़ गिरने शुरू हो गए हैं।

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