हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायिक आदेशों को गंभीरता से न लेने पर ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-7 शिमला से स्पष्टीकरण मांगा गया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने सोहन सिंह बनाम मास्टर साहिल वर्मा नामक मामले में मंगाए गए रिकॉर्ड को समय पर न भेजने और तथ्यों की जांच किए बिना कोर्ट में झूठा जवाब देने पर यह स्पष्टीकरण मांगा है।
मामले के अनुसार 31 मार्च 2016 को हाईकोर्ट ने इस मामले में ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-7 शिमला से रिकॉर्ड तलब किया था। एक महीने बाद भी जब रिकॉर्ड नहीं पहुंचा तो हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल को न्यायिक आदेश जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट ने तथ्यों की जांच किए बगैर ही ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर तीन के अधीक्षक ग्रेड-दो की ऑफिस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट को बता दिया कि मामले का रिकॉर्ड 23 अप्रैल को भेज दिया था और हाईकोर्ट ने उसी दिन रिकॉर्ड प्राप्त कर लिया था।
वास्तव में मामले से जुड़ा रिकॉर्ड 29 अप्रैल के आदेश के अनुसार चार मई को हाईकोर्ट ने प्राप्त किया। हाईकोर्ट ने ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर सात शिमला के पिछले स्पष्टीकरण से नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि निचली अदालत ने हाईकोर्ट के न्यायिक आदेशों को हल्के में लेकर स्पष्टीकरण की बजाय झूठा जवाब पेश किया। कोर्ट ने 22 जुलाई तक ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण देने को कहा है।