हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड की ओर से लाभार्थियों को पंजीकृत न किए जाने और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को लेकर दायर याचिका में कामगार बोर्ड को आदेश दिए हैं कि दस सप्ताह के भीतर उन सभी वर्कर्स को पंजीकृत करने से संबंधित कदम उठाए जिनके आवेदन श्रम अधिकारी ने या तो रद्द कर दिए हैं या लंबित पड़े हैं।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रार्थी यूनियन को आदेश दिए हैं कि वह इन वर्कर्स के आवेदन पत्रों में रह गई कमियों को अधिनियम और नियमों के अनुसार चार सप्ताह के भीतर दूर करें। ज्ञात रहे कि भवन एवं अन्य निर्माण कामगार (रेगुलेशन ऑफ एंप्लॉयमेंट एंड कंडीशंस ऑफ सर्विस) 1996 अधिनियम के तहत 211 कामगारों का पंजीकरण धर्मशाला स्थित श्रम कल्याण अधिकारी ने नहीं किया था।
श्रम अधिकारी के इस आदेश को प्रार्थी ने बोर्ड के सचिव के समक्ष चुनौती दी। बोर्ड के सचिव ने इस अपील को 31 जनवरी को रद्द करते हुए श्रम अधिकारी के आदेश पर मुहर लगा दी थी। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि बोर्ड अब अपने पिछले आदेशों को नजरंदाज कर वर्कर्स का पंजीकरण करेगा।
याचिका का जवाब देते हुए बोर्ड ने अदालत को अवगत करवाया कि ऊना जिले के दुलेहर में 4,46,44,100 रुपये की लागत से वर्कर्स होस्टल बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण एचपीएसआईडीसी की ओर से किया जा रहा है। अदालत ने बोर्ड को आदेश दिए हैं कि इस होस्टल का निर्माण पूरी तरह से एक साल में सुनिश्चित करें। अदालत को बताया गया कि इसी तर्ज पर गंसोत (तहसील नालागढ़) में भी वर्कर्स होस्टल बनाया जा रहा है।
अदालत ने इस होस्टल के निर्माण के लिए दो साल की अवधि का समय दिया है। बोर्ड ने अदालत को बताया कि चंबा और मंडी में भी होस्टल बनाए जाने की योजना है, लेकिन मंडी के लिए जिस जमीन का चयन किया गया है, उसमे पेड़ हैं। अदालत ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, डीसी ऊना, डीसी शिमला, डीसी किन्नौर और डीसी चंबा को अतिरिक्त प्रतिवादी बनाते हुए पर्यावरण मंत्रालय को आदेश दिए हैं कि वह राज्य सरकार की मांग पर जरूरी स्वीकृति प्रदान करे।
अदालत को बताया गया कि शिमला, सिरमौर और किन्नौर जिलों में भी होस्टल बनाने एवं ऊना में कौशल विकास प्रशिक्षण संस्थान बनाए जाने की योजना है, जिसका कार्य पूरा करने के लिए अदालत ने एक वर्ष का समय दिया है। मामले की सुनवाई तीन महीने बाद निर्धारित की गई है।