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हिमाचल: गलत आय प्रमाण देने पर हाईकोर्ट से झटका, मल्टीटास्क वर्कर का पद जाएगा अगले उम्मीदवार को

Tue, 07 Jul 2026 05:40 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में वर्ष 2024 से जारी अंतरिम रोक को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि संबंधित पद को मेरिट सूची में अगले स्थान पर मौजूद उम्मीदवार को सौंप दिया जाए।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मल्टीटास्क वर्कर की ओर से गलत आय प्रमाण देने पर अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में वर्ष 2024 से जारी अंतरिम रोक को तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि संबंधित पद को मेरिट सूची में अगले स्थान पर मौजूद उम्मीदवार को सौंप दिया जाए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सामने आया कि इसी मामले से जुड़े हाईकोर्ट की एक अन्य समन्वय पीठ ने 25 जून 2026 को आदेश पारित किए थे।उस फैसले में कोर्ट ने अथॉरिटी की ओर से याचिकाकर्ता के आय प्रमाणपत्र को रद्द करने के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया था।

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हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि पुराना प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद अब कानून के अनुसार छह सप्ताह के भीतर नया आय प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जाए। अदालत ने याचिकाकर्ता को दो विकल्प दिए। पहला, या तो वह हलफनामा दे कि यदि नया आय प्रमाणपत्र निर्धारित सीमा से अधिक का बनता है, तो वह अब तक प्राप्त सारा वेतन सरकार को वापस करेगी या अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया जाए। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उनकी मुवक्किल एक गरीब विधवा महिला है, इसलिए वह ऐसा कोई हलफनामा देने की स्थिति में नहीं है।
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याचिकाकर्ता की ओर से असमर्थता जताए जाने के बाद अदालत ने 13 जून 2024 को जारी अंतरिम रोक के आदेश को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता पवना देवी को 1 जून 2022 को एक आय प्रमाणपत्र जारी किया गया था, जिसमें वार्षिक पारिवारिक आय 34 हजार रुपये से कम दिखाई गई थी। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उनका चयन शिक्षा विभाग में मल्टीटास्क वर्कर के पद पर हुआ था। इसके बाद 21 जुलाई 2022 को प्रतिवादी शिकायतकर्ता ने एसडीएम थुनाग को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चयनित उम्मीदवार ने आय प्रमाणपत्र लेते समय खुद को गरीब दिखाने के लिए तथ्यों को छुपाया है।
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