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सरकार की पैरवी करने वाले वकीलों के चयन पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Wed, 21 Dec 2016 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट और प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में सरकार की ओर से पैरवी करने के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ताओं, उप महाधिवक्ताओं और सहायक महाधिवक्ताओं के चयन पर सवालिया निशान लगाने वाली याचिका में केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर जवाबतलब किया गया है। 
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मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने कुछ अधिवक्ताओं की ओर से संयुक्त रूप से दायर की गई याचिका की सुनवाई के बाद ये आदेश जारी किए। अगली सुनवाई 21 मार्च को निर्धारित की गई है। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार प्रदेश में इस तरह के विधि अधिकारियों की नियुक्ति के लिए कोई भी चयन नीति नहीं बनाई गई है।

इनके चयन के लिए न तो कोई आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं और न ही इनके चयन के लिए किसी प्रक्रिया को अपनाया जाता है। इनके चयन के लिए कोई विशेष योग्यता मापदंड भी नहीं बनाए गए हैं और न ही इनकी नियुक्ति की संख्या बारे सर्वेक्षण किया जाता है। प्रार्थी वकीलों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि राज्य सरकार को आदेश दिए जाएं कि इन विधि अधिकारियों के चयन के लिए कोई ठोस नीति बनाए।
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एमएमयू की मेडिकल कॉलेज के नियंत्रण वाली याचिका खारिज

court shimla
 हाईकोर्ट ने महर्षि मार्कंडेय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की याचिका खारिज कर दी है। इसमें कॉलेज को केवल एमएमयू अधिनियम के अधीन चलाने के आदेशों की गुहार लगाई गई थी। यह मांग भी की थी कि एमएमयू अधिनियम के तहत चलने वाले कॉलेज को प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्धता को बाध्य करने का प्रावधान खारिज किया जाए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर, न्यायाधीश तरलोक सिंह की खंडपीठ ने एमएमयू की इस गुहार को खारिज किया। 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मेडिकल कॉलेजों को एफिलिएशन देने का दायित्व राज्य सरकार के पास है तो इन परिस्थितियों में न तो केंद्र और न ही एमसीआई राज्य सरकार को आदेश दे सकती है कि किस मेडिकल कॉलेज को किस विश्वविद्यालय से संबद्धता देनी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी मेडिकल कॉलेज जो संबद्धता का इच्छुक है, वह एचपीयू अधिनियम 1970 के प्रावधानों को मानने के लिए बाध्य है। ऐसे कॉलेजों को अपनी मर्जी के विश्वविद्यालय से संबद्धता हासिल करने की छूट नहीं दी जा सकती।
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हाईकोर्ट ने कहा, राज्य तय करेगा किस कॉलेज को किस विवि से देनी है संबद्धता

गौरतलब है कि प्रार्थी महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय ने निजी मेडिकल शिक्षण संस्थान (प्रवेश और शुल्क के निर्धारण का विनियमन) अधिनियम 2006 में संशोधन किए जाने को चुनौती दी थी। इसके तहत सभी निजी चिकित्सा संस्थानों को एचपीयू से संबद्धता लेने का निर्णय लिया गया था। राज्य सरकार ने एचपीयू के साथ कालेज की संबद्धता के मुद्दे पर कुमारहट्टी (सोलन) में महर्षि मार्कंडेश्वर मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के संचालन पर अंकुश लगा दिया था।

प्रार्थी महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय ने याचिका के माध्यम से हिमाचल प्रदेश निजी चिकित्सा संस्थान अधिनियम 2006 की धारा (3) की उपधारा (6) में संशोधन को चुनौती दी थी, जिसके तहत फैसला किया गया था कि राज्य में चिकित्सा शिक्षा की उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए आम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए केवल एचपीयू से संबद्ध निजी मेडिकल कालेज राज्य में स्थापित करने का अनन्य अधिकार होगा।

विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2015-16 में मेडिकल कोर्स की सीटों के दाखिले के लिए 26 सितंबर 2014 को जारी अधिसूचना के दायरे में न लाए जाने की गुहार लगाई थी, जिसे प्रदेश हाई कोर्ट ने ठुकरा दिया था। अधिसूचना के अनुसार दाखिला राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में मेरिट के आधार पर ही दाखिला दिए जाने का प्रावधान है।  प्रार्थी का कहना था कि वह सरकार से किसी भी तरह की वित्तीय सहायता नहीं लेते हैं।

इसलिए इस तरह प्रवेश परीक्षा से दाखिला करवाना उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। राज्य  सरकार ने दलील दी थी कि निजी संस्थानों की मेडिकल सीटों को भरने के लिए प्रदेश प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनल 2006 बनाया गया है जिसके नियमों के तहत ही विश्वविद्यालय को दाखिले देने होंगे लेकिन मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय दाखिला नहीं दे रहा था।
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