दवा खरीद मामले में हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वह हलफनामे के माध्यम से बताएं कि इस वित्त वर्ष में वितरण के लिए दवाओं की खरीद पर कितना पैसा खर्च किया गया?
शपथपत्र में यह भी बताना होगा कि क्या डॉक्टर मरीजों को दवा लिखते समय मुफ्त वितरण की दवाएं लिखते हैं या नहीं? क्या डॉक्टर मुफ्त दवाइयों के बारे में मरीजों को जानकारी दे रहे हैं?
कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा है कि सरकार की ओर से वितरण के लिए खरीदी गई दवाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने को क्या कदम उठाए गए? जनता को इस बारे में सूचित करने के लिए सरकार क्या तरीके अपना रही है?
क्या दवाओं के वितरण संबंधी विस्तृत जानकारी जनता के ध्यान में लाने के लिए साइन बोर्ड उपयुक्त स्थान पर लगाए गए हैं? दवा वितरण में कोताही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने क्या कार्रवाई की है?
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जनहित से जुड़े इस मामले में प्रधान सचिव आयुर्वेद, डायरेक्टर आयुर्वेद को प्रतिवादी बनाते हुए उन्हें भी उपरोक्त बिंदुओं पर अपना-अपना हलफ नामा दायर करने के आदेश दिए। मामले पर सुनवाई 11 सितंबर को होगी।