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वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर कब्जा करने वालों का रिकार्ड तलब

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प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह वक्फ बोर्ड की संपत्ति की तमाम जानकारी कोर्ट में मुहैया करवाए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने राजस्व विभाग और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को आदेश दिए कि वह उन सभी लोगों का ब्यौरा कोर्ट को सौंपे, जिन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर अवैध तरीके से कब्जा किया हुआ है।
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हाईकोर्ट ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता इमरान खान की याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। याचिका में प्रार्थी ने राज्य की मस्जिदों के रखरखाव व मरम्मत बाबत जरूरी दिशा निर्देश देने की गुहार लगाई। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदेश की मस्जिदों को अवैध तरीके से कुछ लोगों ने अपने कब्जे में कर रखा है।

कंडक्टर भर्ती पर भी आया फैसला

इनको इन मस्जिदों में रहने की जरूरी स्वीकृति प्राप्त नहीं है। इन लोगों की वास्तविक पहचान न होने के कारण प्रदेश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा इन मस्जिदों में कार्यालय, गोदाम और दुकानें खोली गई है। लोग धड़ल्ले से बेरोकटोक अपना व्यवसाय इन मस्जिदों में चला रहे हैं। इस तरह की गतिविधियों ने मस्जिदों की पवित्रता को क्षति पहुंचाई है।

मस्जिदों में ऐसी गतिविधियों के कारण मुस्लिम समुदाय की आस्था को नुकसान हो रहा है। प्रार्थी के अनुसार शिमला शहर में ही कश्मीर, सहारनपुर और उत्तरप्रदेश से आए मुस्लिम लोगों ने इन मस्जिदों में व्यवसाय का केंद्र बना कर रखा है। प्रार्थी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि इन मस्जिदों में रहने वाले अवैध कब्जाधारियों को बेदखल करने के आदेश दिए जाएं।

कंडक्टर भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हिमाचल हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। लंबी बहस के बाद मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रखा। बता दें कि चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतने के आरोप लगे हैं। कोर्ट में भर्ती को खारिज करने की गुहार लगाई गई है।
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सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी की जमानत खारिज

हिमाचल हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी सर्वा नंद की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में जमानत नहीं दी जानी चाहिए। यह अपराध हत्या से भी घिनौना है। हत्या किसी इंसान के शरीर को खत्म करती है जबकि दुष्कर्र्म असहाय युवती की आत्मा को ही मार देता है।

यह अपराध किसी युवती की निजता और पवित्रता के अधिकार को खत्म करता है। ऐसे मामलों में जमानत देते समय अदालतों को इस तरह की परिस्थितियों को दिमाग में रखना चाहिए। मामले के अनुसार सह आरोपी मनोज कुमार युवती को फोन कर तंग करता था। उसने वारदात के दिन अपने सहयोगियों आशीष कुमार और महेंद्र कुमार से साथ मिलकर युवती से दुष्कर्म किया। युवती को इसके पश्चात बरमाणा ले गए।

यहां पर सर्वा नंद ने भी युवती से दुष्कर्म किया। 27 जून की सुबह युवती ने अपने भाई से संपर्क किया और वारदात के बारे में बताया। 28 जून को मामला बरमाणा पुलिस थाने में दर्ज किया गया। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि प्रार्थी इस मामले में प्रथम दृष्टया संलिप्त है। इस कारण वह जमानत पर छोड़े जाने का हक नहीं रखता है।
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