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भारत ने चीन-पाकिस्तान सीमा पर शुरू की किलेबंदी

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भारत ने चीन-पाकिस्तान सीमा पर किलेबंदी शुरू कर दी है। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है। पाकिस्तान-चीन सीमा से सटे कारगिल क्षेत्र में भी सेना अब आसानी से पहुंच सकेगी। विपरीत परिस्थितियों में रसद को सीमा पर आसानी से और जल्द पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए हिमाचल से होकर कारगिल के लिए एक नया वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है।
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सामरिक महत्त्व के इस मार्ग से मनाली से कारगिल की दूरी करीब 350 किलोमीटर कम हो जाएगी। खास है कि इस सड़क से सीमा तक पहुंचने के लिए अब बड़े-बड़े दर्रों को भी पार नहीं करना होगा। करीब सोलह हजार फीट ऊंचे शिंकुला दर्रे से होकर बन रही ये सड़क सीधे कारगिल पहुंचाएगी। सीमा सड़क संगठन का दावा है कि इसी वर्ष सितंबर तक यह सड़क बन कर तैयार हो जाएगी।

शिंकुला दर्रे से तैयार किया जा रहा वैकल्पिक मार्ग

वर्तमान में कारगिल तक पहुंचने लिए मनाली-लेह सड़क एक वैकल्पिक मार्ग है। कारगिल युद्ध के दौरान इस मार्ग से ही सेना ने सीमा तक रसद पहुंचाई थी। लेकिन करीब 750 किलोमीटर लंबा ये मार्ग रोहतांग, बारालाचा, खार्दुंगला और तंगलंगला जैसे दर्रों से होकर गुजरता है। इन दर्रों में 15 से 20 फीट तक बर्फ गिरती है और इस रोड को बहाल करने में बीआरओ को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

इसके मद्देनजर शिंकुला दर्रे से होकर यह शॉर्ट वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया है। इस रास्ते से मनाली से कारगिल की दूरी करीब 400 किलोमीटर रहेगी। निर्माणाधीन दारचा-शिंकुला-पदुम सड़क का जिम्मा बीआरओ के हिमांक और दीपक प्रोजेक्ट के पास है। हिमाचल की ओर से शिंकुला दर्रे से सात किलोमीटर पहले तक सड़क बन चुकी है। कारगिल की ओर से बीआरओ शिंकुला से 30 किमी दूर है।
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बारह महीने मार्ग खुला रखने की योजना

दीपक प्रोजेक्ट 38 बार्डर रोड टास्क फोर्स के कमांडर कर्नल केपी राजेंद्र कुमार का दावा है कि सितंबर माह में हिमाचल की ओर से शिंकुला दर्रा तक सड़क बना दी जाएगी। मशीनें आरडी 32 तक पहुंच चुकी हैं। शिंकुला दर्रा से निर्माण कार्य का जायजा लेकर लौटे कर्नल केपी राजेंद्र का दावा है सब कुछ ठीक रहा तो सितंबर महीने तक शिंकुला दर्रा तक हल्के वाहनों के लिए सड़क बन जाएगी।

मनाली-कारगिल मार्ग भारी बर्फबारी के चलते वर्तमान में छह माह तक बंद रहता है। यह रोड रोहतांग (13050 फीट), बारालाचा (15700 फीट), खार्दुंगला (19500 फीट), तंगलंगला (18000 फीट) से होकर गुजरता है। वैकल्पिक मार्ग शिंकुला दर्रा होकर बन रहा है।

शिंकुला के अलावा इस रोड में रोहतांग दर्रा आएगा। रोहतांग के नीचे से टनल बनाई जा रही है। यह टनल वर्ष 2018 तक तैयार करने का लक्ष्य है। बीआरओ का मानना है कि शिंकुला दर्रा अन्य दर्रों से आसान है। ऐसे में रोहतांग टनल बनने पर इस मार्ग को 12 महीने तक खुला रखा जा सकेगा।
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