हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के हित में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारियों की नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत विज्ञापन जारी कर, पूरी चयन प्रक्रिया अपनाकर और स्वीकृत पदों पर की गई है, तो नियमितीकरण के बाद उनकी पूरी अनुबंध अवधि को सेवा लाभों के लिए गिना जाएगा। इसमें वरिष्ठता, सालाना वेतन वृद्धि, वेतन निर्धारण, पदोन्नति और पेंशन संबंधी लाभ शामिल हैं। न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थी ऐसे में अनुबंध अवधि को सेवा लाभों से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता समय रहते न्यायालय की शरण में आए थे, इसलिए उन्हें प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से देय सभी वित्तीय लाभ दिए जाएं।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर कर्मचारियों के बकाया वित्तीय लाभ का भुगतान किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। यह फैसला मनोज कुमार, अजय कुमार और भूपेंद्र पाल की ओर से दायर विभिन्न याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई के दौरान सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2010 में जारी विज्ञापन के आधार पर भाषा अध्यापक, टीजीटी (मेडिकल) और ड्रॉइंग मास्टर के पदों के लिए आवेदन किया था। उन्होंने भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत आयोजित लिखित परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की थी। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें तत्काल नियमित नियुक्ति देने के बजाय वर्ष 2012 में 13,500 रुपये के निश्चित वेतन पर अनुबंध आधार पर नियुक्त किया। बाद में उनकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, लेकिन अनुबंध अवधि को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों में शामिल नहीं किया गया। इसी को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।