हिमाचल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया है, जिसके तहत धर्मशाला शहर का चयन स्मार्ट सिटी योजना के लिए किया गया था। कोर्ट ने स्मार्ट सिटी चयन समिति को आदेश दिए हैं कि वह दो सप्ताह के भीतर दोबारा नए सिरे से धर्मशाला और शिमला शहर के आंकड़ों पर ठीक ढंग से विचार करे।
इस योजना के लिए उपयुक्त शहर का चयन कर स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सिफारिश करे। न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने शिमला नगर निगम के मेयर संजय चौहान की याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिए।
प्रार्थी संजय चौहान ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया था कि धर्मशाला शहर का चयन गलत आंकड़ों को पेश कर किया गया है। चयन समिति को गुमराह कर ऐसी रिपोर्ट तैयार की गई, जो पूर्णतया तथ्यों और योजना के विपरीत थी।
फर्जी आंकड़ों के आधार पर चुना गया धर्मशाला
शिमला पहले से ही विकसित है, इस कारण इसे स्मार्ट सिटी बनाने के लिए ज्यादा जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी जबकि धर्मशाला का पूरा का पूरा कायाकल्प करना पड़ेगा। इसमें बहुत सी परेशानियां सामने आना लाजिमी है। प्रार्थी के अनुसार शिमला को दुनिया के कोने-कोने में पर्यटन नगरी व पहाड़ों की रानी के नाम से जाना जाता है।
धर्मशाला का नाम पर्यटन की दृष्टि से न के बराबर है। प्रार्थी ने याचिका में राज्य सरकार पर आरोप लगाए थे कि प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के समक्ष शिमला से संबंधित सही रिपोर्ट नहीं रखी। योजना के तहत तय किए गए मापदंडों को दरकिनार कर धर्मशाला को गलत ढंग से नंबर दिए।
महापौर को चयन अथवा मूल्यांकन समिति की बैठक में भी नहीं बुलाया गया जबकि योजना के तहत ऐसा किया जाना जरूरी था। याचिका में यह भी कहा गया था कि चयन समिति के सामने धर्मशाला से जुड़े जो आंकड़े पेश किए गए वह फर्जी थे और इन्हीं फर्जी आंकड़ों के आधार पर धर्मशाला का चयन किया गया।
धर्मशाला एमसी बोला, नहीं की धोखाधड़ी
धर्मशाला नगर निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया की स्मार्ट सिटी के चयन में कोई धोखाधड़ी नहीं की गई। धर्मशाला शिमला से बेहतर विकसित होता हुआ शहर है। धर्मशाला में शिमला के बजाय स्मार्ट सिटी बनने की अपार संभावनाएं हैं।
धर्मशाला में एक एयरपोर्ट भी है। याचिकाकर्ता ने इसके जवाब में कहा था कि शिमला शहर में लाखों पर्यटक हर साल आते हैं। सरकार ने आंकड़ों के आधार पर शिमला की जगह धर्मशाला को स्मार्ट सिटी योजना में लाए जाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था।
बैठक में जल्दबाजी से लिया फैसला- हाईकोर्ट ने प्रार्थी की दलीलों पर सहमति जताते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई। स्मार्ट सिटी के लिए रखी बैठक में जल्दबाजी में निर्णय लिया गया। कई अहम सदस्य अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाए, उन्हें समय रहते सूचित नहीं किया गया।
कोर्ट की अफसरों पर तल्ख टिप्पणी- हाईकोर्ट ने हिदायत दी कि नौकरशाहों को लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए संवैधानिक नीति के दृष्टिगत स्वतंत्र निर्णय लेने चाहिए। इससे कानून का राज स्थापित करने में मदद मिलेगी। अधिकारियों को अपने विवेक का आत्मसमर्पण नहीं करना चाहिए।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सरकार
धर्मशाला का स्मार्ट सिटी के लिए चयन रद्द करने के हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है। प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के फैसले की प्रति का इंतजार कर रही है। प्रदेश सरकार का कहना है कि धर्मशाला को नियमों के तहत स्मार्ट सिटी बनाया गया है, जबकि शिमला शहर को ‘अमृत’ योजना में लिया गया है।
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि अभी प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के आर्डर की प्रति नहीं मिली है। अगर हाईकोर्ट ने धर्मशाला के चयन को गलत ठहराया है तो प्रदेश सरकार इस बारे में स्थिति स्पष्ट करेगी। उन्होंने कहा कि शिमला को ‘अमृत’ योजना में शामिल किया गया है।
नगर निगम अगर शिमला को ‘अमृत’ योजना में शामिल नहीं करना नहीं चाहता है तो वह प्रदेश सरकार को लिखित में दे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।