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अवैध भवन नियमित करने के मामले की सुनवाई टली, इस दिन आएगा फैसला

Thu, 27 Jul 2017 12:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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प्रदेश हाईकोर्ट में अवैध भवनों को नियमित करने के लिए बनाए गए संशोधित कानून को चुनौती देने वाले मामले पर सुनवाई 9 अगस्त के लिए टल गई है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल तथा न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ के समक्ष अभिमन्यु राठौर तथा अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई।

इस संशोधित कानून के तहत नियमितीकरण के लिए संबंधित लोगों को 60 दिन का समय देते हुए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। आवेदन के साथ 1000 की फीस भी मांगी गई है।

इस कानून के तहत आए आवेदनों का निपटारा एक वर्ष के भीतर किया जाना है। इसमें जैसा है, जहां है वाली नीति को अपनाते हुए नियमितीकरण करने की योजना है।

प्रार्थियों का कहना है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति अवैध निर्माण की इजाजत नहीं देती। मामले पर अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी।

शास्त्री परीक्षा का मामला 16 अगस्त तक टला

हाईकोर्ट में शास्त्री पदों के लिए ठियोग में हुई परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतों के मामले में सुनवाई 16 अगस्त के लिए टल गई है। इस मामले में पारित अंतरिम आदेशों के तहत कोर्ट ने प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की ओर से शास्त्री पदों को भरने के लिए ली गई परीक्षा के परिणाम पर रोक लगा रखी है। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने निर्देश दिए थे कि कोर्ट की अनुमति के बिना परीक्षा परिणाम घोषित न किया जाए। चयन आयोग से कोर्ट को बताया गया कि इस प्रकरण की जांच एडीएम शिमला द्वारा की जा रही है।

उनकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। बेरोजगार शास्त्री संघ के अध्यक्ष एवं अन्य परीक्षार्थियों की ओर से लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि 28 मई को आयोजित परीक्षा में ठियोग केंद्र में उदंड परीक्षार्थियों ने जमकर नकल की। कुछ परीक्षार्थी पुस्तक, मोबाइल फोन का प्रयोग भी कर रहे थे।

आरोप लगाया कि परीक्षा में किसी भी तरह की पारदर्शिता नहीं बरती गई। एक-एक बेंच पर तीन-तीन परीक्षार्थी बैठे थे। प्रार्थियों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि कर्मचारी चयन आयोग पर उचित कार्रवाई कर ठियोग परीक्षा केंद्र को रद्द किया जाए।

उन्होंने दोबारा इस परीक्षा को करवाने की मांग की है। प्रार्थियों ने ठियोग परीक्षा केंद्र के संचालकों पर कार्रवाई करने की मांग भी की है। कोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग के सचिव, एसडीएम ठियोग, राजकीय कन्या विद्यालय ठियोग के परीक्षा केंद्र अधीक्षक व प्रधानाचार्य को भी नोटिस जारी किया था।
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कोर्ट ने वन विभाग से पूछा, फील्ड के कितने कर्मचारी दफ्तर में दे रहे सेवाएं

हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य अरण्यपाल को निर्देश दिए कि वह दो दिन में बताएं कि वन विभाग के ऐसे कितने फील्ड कर्मचारी हैं, जिनसे कार्यालय में सेवाएं ली जा रही हैं। कोर्ट ने यह शपथपत्र के माध्यम से बताने को कहा है। वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड, ब्लॉक ऑफिसर, डिप्टी रेंजर, रेंज ऑफिसर, सहायक वन अरण्यपाल, डीएफ ओ, अरण्यपाल और प्रधान अरण्यपाल के कितने पद हैं।

इनमें कितने पद रिक्त हैं। कोर्ट ने इसकी जानकारी भी मांगी है। उन्हें यह भी बताना होगा कि कितने लोग एक विशेष पद से संबंधित होने के बावजूद दूसरे पदों का कार्य देख रहे हैं। जिला स्तर पर कितने पड़ रिक्त हैं। इन्हें भरने को विभाग क्या कदम उठा रहा है। 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल एवं न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने जनहित से जुड़े इस मामले में यह आदेश पारित किए। हमीरपुर के देवी सिंह चंदेल की ओर से हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में यह आरोप लगाया है कि वन विभाग के अफसरों का प्रदेश में पूरी तरह से नियंत्रण खत्म हो चुका है।

इस कारण पूरे देश का वातावरण तथा प्रदेश का राजस्व बर्बाद हो रहा है। प्रदेश का प्रशासन पूरी तरह से फेल हो चुका है। वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल मूक दर्शक बने हैं। वन अधिकारियों, कर्मचारियों का मात्र एक उद्देश्य रहता है कि पैसा कैसे बनाया जाए तथा उनकी नियुक्ति की सीट कैसे सुरक्षित रहे। 

यहां तक कि उन्हें ऐसा करने के लिए अच्छा खासा पैसा राजनीतिज्ञों, मंत्रियों और अपने बड़े अधिकारियों को देना पड़ता है। प्रार्थी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि वन विभाग के मुखिया को आईएएस, आईपीएस या फिर एचएएस में से तैनात किए जाने के आदेश पारित करे। मामले पर सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
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